हंगरी का ऐतिहासिक कदम: कम्युनिस्ट दौर के हज़ारों गुप्त मुखबिरों के नाम होंगे सार्वजनिक
हंगरी अपनी कम्युनिस्ट तानाशाही के दौर के एक विवादास्पद अध्याय को खोलने जा रहा है। सरकार ने उस काल के हज़ारों गुप्त मुखबिरों के नाम सार्वजनिक करने का फैसला किया है, जिन्होंने सरकारी सुरक्षा एजेंसियों…
हंगरी अपनी कम्युनिस्ट तानाशाही के दौर के एक विवादास्पद अध्याय को खोलने जा रहा है। सरकार ने उस काल के हज़ारों गुप्त मुखबिरों के नाम सार्वजनिक करने का फैसला किया है, जिन्होंने सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के लिए काम किया था। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम देश के अतीत से जुड़े दबे हुए सच को सामने लाने और लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास बहाल करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री पीटर माग्यार की सरकार 4 नवंबर को एक ऑनलाइन डेटाबेस जारी करेगी। इसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति 1945 से 1989 के बीच सक्रिय रहे एजेंटों और मुखबिरों के नाम खोज सकेगा। हंगरी के कम्युनिस्ट शासन ने समाज पर नज़र रखने और विरोध को दबाने के लिए मुखबिरों का एक व्यापक नेटवर्क बनाया था, जिसमें कथित तौर पर कुछ लोगों को ब्लैकमेल करके तो कुछ को लालच देकर शामिल किया गया था। इन लोगों को अपने पड़ोसियों, दोस्तों, सहकर्मियों और यहां तक कि परिवार के सदस्यों की जासूसी करने के लिए मजबूर किया गया था।
अतीत का सामना
इस फैसले को पूरा करने के लिए सरकार ने सितंबर में एक कानून पारित किया था, जो प्रधानमंत्री माग्यार के चुनावी वादों में से एक था। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "तिस्जा (उनकी सियासी पार्टी) के प्रमुख वादों में से एक को पूरा करते हुए, हम 4 नवंबर को तानाशाही के दौर की गुप्त पुलिस फाइलों को सार्वजनिक करेंगे। यह कई परिवारों के लिए एक कठिन और संवेदनशील मामला होगा, लेकिन अतीत का सामना किए बिना कोई वास्तविक राजनीतिक बदलाव नहीं आ सकता।"
पहले इन फाइलों को 1956 की सोवियत विरोधी क्रांति की वर्षगांठ पर जारी करने की योजना थी, लेकिन बाद में तारीख बदलकर 4 नवंबर कर दी गई। सर्वेक्षणों से पता चलता है कि देश के दो-तिहाई से अधिक लोग इस कदम का समर्थन करते हैं।
दशकों का इंतज़ार खत्म
इन गुप्त फाइलों को दशकों तक सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के ऐतिहासिक अभिलेखागार में रखा गया था, और आम जनता की पहुंच से दूर थीं। अब तक केवल शोधकर्ताओं और पीड़ितों के परिजनों को ही इन रिपोर्टों को देखने की अनुमति थी। इतिहासकारों का अनुमान है कि इन फाइलों में लगभग 50,000 से 60,000 लोगों के नाम हो सकते हैं, जिनमें से करीब 10 प्रतिशत आज भी जीवित हैं। इस खुलासे के बाद हंगरी को पूर्वी यूरोप के कम्युनिस्ट देशों में सबसे पारदर्शी सुरक्षा अभिलेखागार वाला देश माना जा सकता है।
हंगरी में इन दस्तावेज़ों को सार्वजनिक करने पर पिछले तीन दशकों से बहस चल रही थी। तुलनात्मक रूप से, पूर्वी जर्मनी ने 1992 में अपनी कुख्यात स्टासी गुप्त पुलिस की फाइलें खोली थीं, जबकि चेक गणराज्य ने 2003 में और लातविया ने 2018 में यह कदम उठाया था। हंगरी के सामाजिक संबंध एवं संस्कृति मंत्री जोल्टान तार ने फेसबुक पर लिखा, ''एक लोकतांत्रिक समाज को अपने अतीत को जानने का अधिकार है।''
इनपुट: IANS



