चुनाव आयोग में मतभेद? पृथ्वीराज चव्हाण ने CEC के खिलाफ दो आयुक्तों के 14 पत्र सार्वजनिक करने की मांग की
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं…
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने सीईसी के कामकाज पर आपत्ति जताते हुए 14 पत्र लिखे थे, जिन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि आयोग के भीतर की स्थिति स्पष्ट हो सके।
समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, चव्हाण ने कहा कि इस समय सीईसी ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में हुई कथित गड़बड़ियों और गैर-कानूनी कार्यों को लेकर एक आंदोलन चल रहा है, जिसका जिक्र राहुल गांधी ने भी किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर दो आयुक्तों ने लिखित में ऐतराज जताया है, तो यह इस बात का साफ संकेत है कि आयोग के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है।
कानून और बहुमत का सवाल
पृथ्वीराज चव्हाण ने चुनाव आयोग के कानूनी ढांचे का हवाला देते हुए कहा कि यह एक तीन सदस्यीय निकाय है, जहां सभी फैसले या तो सर्वसम्मति से या बहुमत के आधार पर लिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा, "अगर आम सहमति नहीं बनती है, तो बहुमत के आधार पर फैसला किया जाता है। इसलिए स्थिति बिल्कुल साफ है।"
चव्हाण ने आरोप लगाया कि कई महीनों से दोनों चुनाव आयुक्तों की बातों को नजरअंदाज किया जा रहा था। उन्होंने कहा, "अगर दो चुनाव आयुक्त किसी खास एक्शन के पक्ष में हैं तो वे बहुमत बनाते हैं। इसलिए अगर कोई एक्शन उनके विचारों और पक्ष के खिलाफ लिया गया है तो वह गैरकानूनी है।" कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि यह मामला चुनाव में हार-जीत का नहीं, बल्कि आयोग द्वारा लिए गए फैसलों की वैधता का है।
इनपुट: IANS



