सरकार ने दोगुनी की छोटे कारोबारियों के लिए जीएसटी छूट की सीमा

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छोटे कारोबारियों के लिए एक नयी खुश खबरी है | जीएसटी परिषद ने बृहस्पतिवार को अब छोटे कारोबारियों को जीएसटी से राहत देते हुए छूट सीमा को 20 लाख से बढ़ाकर 40 लाख रुपये वार्षिक कर दिया है जबकि पूर्वोत्तर राज्यों के लिए इसे बढ़ाकर 20 लाख रुपये किया गया है |

छोटे कारोबारियों को राहत देते हुए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने गुरुवार को जीएसटी से छूट की सीमा को बढ़ाकर दोगुना कर दिया. इसके अलावा कंपोजिशन योजना का लाभ लेने की सीमा को भी बढ़ा दिया गया है | वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि जीएसटी परिषद ने छोटे कारोबारियों को जीएसटी से राहत देते हुए छूट सीमा को 20 लाख से बढ़ाकर 40 लाख रुपये वार्षिक कर दिया है जबकि पूर्वोत्तर राज्यों के लिए इसे बढ़ाकर 20 लाख रुपये किया गया है.

इसके अलावा जीएसटी कंपोजिशन योजना का लाभ लेने की सीमा भी बढ़ाई गई है. इस योजना के तहत छोटे व्यापारियों और कंपनियों को उत्पादों के मूल्य वृद्धि के बजाय अपने कारोबार के हिसाब से मामूली दर पर कर देना होता है |

वित्त मंत्री ने कहा कि कम्पोजिशन योजना के तहत छोटे व्यापारियों को अपने कारोबार के आधार पर एक प्रतिशत का कर देना होता है. एक अप्रैल से अब इस योजना का लाभ डेढ़ करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले उठा सकते हैं. इसके अलावा 50 लाख रुपये तक का कारोबार करने वाले सेवा प्रदाता और माल आपूर्ति दोनों काम करने वाले कारोबारी भी जीएसटी कम्पोजिशन योजना का विकल्प चुन सकते हैं. उन्हें छह प्रतिशत की दर से कर देना होगा. कम्पोजिशन योजना के तहत लिये गये इन दोनों निर्णयों से राजस्व पर सालाना 3,000 करोड़ रुपये तक का प्रभाव होगा. जेटली ने बाद में ट्वीट किया कि जीएसटी काउंसिल ने अपनी 32वीं बैठक में बृहस्पतिवार को MSME क्षेत्र को बड़ी राहत दी है|

रियल एस्‍टेट के लिए तय होंगी GST की दरें
जेटली ने कहा कि रियल एस्टेट क्षेत्र की जीएसटी दर तय करने के मुद्दे पर एक सात सदस्यीय मंत्री समूह बनाया गया है. लॉटरी को जीएसटी के दायरे में लाने के मामले में भी अलग अलग विचार रहे इस पर भी एक मंत्री समूह विचार करेगा. जेटली ने कहा कि कम्पोजिशन योजना का विकल्प चुनने वालों को सालाना सिर्फ एक टैक्‍स रिटर्न दाखिल करना होगा और हर तिमाही में एक बार टैक्‍स  का भुगतान करना होगा. उन्होंने कहा कि जीएसटी का एक बड़ा हिस्सा संगठित क्षेत्र और बड़ी कंपनियों से आता है. इन सभी फैसलों का मकसद SME की मदद करना है. उन्हें कई विकल्प दिए गए हैं. यदि वे सेवा क्षेत्र में हैं तो 6% कर का विकल्प चुन सकते हैं. विनिर्माण और व्यापार में हैं और डेढ़ करोड़ रुपये का कारोबार है तो 1% कर देना होगा. वे 40 लाख रुपये तक की छूट सीमा का लाभ ले सकते हैं.