यमुना प्राधिकरण जा रहे किसानों को पुलिस ने हिरासत में लिया, शांतिपूर्ण प्रदर्शन से पहले तनाव
ग्रेटर नोएडा में लंबे समय से लंबित अपनी मांगों को लेकर यमुना प्राधिकरण के कार्यालय की ओर मार्च कर रहे किसानों को पुलिस ने रास्ते में ही रोककर हिरासत में ले लिया। किसान संगठन शांतिपूर्ण तरीके से…
ग्रेटर नोएडा में लंबे समय से लंबित अपनी मांगों को लेकर यमुना प्राधिकरण के कार्यालय की ओर मार्च कर रहे किसानों को पुलिस ने रास्ते में ही रोककर हिरासत में ले लिया। किसान संगठन शांतिपूर्ण तरीके से महापड़ाव की तैयारी में थे, लेकिन इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया और किसानों ने प्रशासन पर उनकी आवाज दबाने का आरोप लगाया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, तीन दर्जन से ज्यादा किसानों को हिरासत में लेकर बसों से हटाया गया।
यह प्रदर्शन किसान संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में हो रहा था, जिसमें नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के किसान शामिल थे। किसानों का कहना है कि वे गांधीवादी तरीके से अपनी बात रखने जा रहे थे, लेकिन उन्हें प्राधिकरण कार्यालय पहुंचने ही नहीं दिया गया। मौके पर पहले से ही भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
पुलिस पर लगे गंभीर आरोप
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति ने एक बयान जारी कर पुलिस पर महिला किसानों के साथ अभद्रता करने और उन्हें घसीटकर बसों में बैठाने का आरोप लगाया है। संगठन का यह भी आरोप है कि बुजुर्ग किसानों पर लाठियां चलाई गईं और घटना की वीडियो बना रहे युवाओं के मोबाइल फोन छीन लिए गए। प्रदर्शन का समर्थन कर रहे कुछ वकीलों के साथ भी मारपीट का आरोप है, जिसमें कहा गया कि कई पुलिसकर्मियों ने उन्हें घेरकर पीटा।
क्या हैं किसानों की मुख्य मांगें?
किसान कई वर्षों से अपनी कुछ प्रमुख मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, जिनका समाधान अब तक नहीं हो पाया है। इन मांगों में शामिल हैं:
- अधिग्रहित जमीन के बदले 10 प्रतिशत विकसित प्लॉट देना।
- किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे का भुगतान करना।
- किसानों की आबादी से जुड़े मामलों का पूरी तरह से निस्तारण करना।
किसान संगठनों का कहना है कि वे बार-बार आंदोलन के लिए मजबूर हो रहे हैं क्योंकि प्राधिकरण और प्रशासन बातचीत के जरिए उनकी समस्याओं को हल नहीं कर रहे हैं।
घटना के बाद की चार प्रमुख मांगें
पुलिस कार्रवाई के विरोध में भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति ने प्रशासन के सामने चार सूत्रीय मांग रखी है। संगठन ने पूरे घटनाक्रम की न्यायिक जांच और दोषी अधिकारियों के निलंबन की मांग की है। इसके अलावा, घायल किसानों और वकीलों के इलाज और मुआवजे की भी मांग उठाई गई है। संगठन ने यह भी मांग की है कि यमुना प्राधिकरण के सीईओ तत्काल किसानों से बात करें और हिरासत में लिए गए सभी लोगों को तुरंत रिहा किया जाए। यूनियन ने इस मुद्दे पर किसान, मजदूर, खाप पंचायतों और सामाजिक संगठनों से एकजुट होने की अपील की है।
इनपुट: IANS



