पेट्रोल निर्यात अब टैक्स-फ्री, लेकिन डीज़ल और विमान ईंधन के एक्सपोर्ट पर सरकार ने बढ़ाई ड्यूटी
केंद्र सरकार ने ईंधन निर्यात से जुड़ी अपनी शुल्क नीति में बड़ा बदलाव किया है। पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Special Additional Excise Duty) को पूरी तरह खत्म कर दिया गया…
केंद्र सरकार ने ईंधन निर्यात से जुड़ी अपनी शुल्क नीति में बड़ा बदलाव किया है। पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Special Additional Excise Duty) को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। वहीं, दूसरी ओर डीज़ल और विमान ईंधन (ATF) के निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी बढ़ा दी गई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने शनिवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी की।
इन संशोधनों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तेल रिफाइनरियां घरेलू ज़रूरतों को प्राथमिकता दें, खासकर ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में ऊंची कीमतों के कारण निर्यात करना ज़्यादा फायदेमंद हो सकता है। सरकार हर 15 दिनों में इन शुल्कों की समीक्षा करती है ताकि वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों के हिसाब से तालमेल बिठाया जा सके।
निर्यात शुल्कों में क्या बदला?
नई दरों के मुताबिक, पेट्रोल के निर्यात पर अब कोई शुल्क नहीं लगेगा, जो पहले 2.5 रुपये प्रति लीटर था। इसके विपरीत, डीज़ल के निर्यात पर शुल्क 8.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 11.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, यानी इसमें 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह, एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर शुल्क 10.50 रुपये से बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जिसमें 0.50 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है।
क्यों लागू हुए थे ये शुल्क?
सरकार ने इन निर्यात शुल्कों को मार्च के अंत में लागू किया था। इसका मुख्य कारण मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष और उससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधा थी, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई थीं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल आया है।
ब्रेंट क्रूड के दाम अब 113.10 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं। पिछले एक हफ्ते में इसमें 1.55%, एक महीने में 15.71% और तीन महीनों में लगभग 26% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। संघर्ष से पहले, भारत का करीब 45% कच्चा तेल आयात होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से ही होता था, जो फारस की खाड़ी को वैश्विक बाज़ारों से जोड़ने वाला एक अहम समुद्री मार्ग है।
इनपुट: IANS



