सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, जानिए भारतीय बाज़ार में क्यों सस्ता हुआ सोना?
हफ्ते के पहले कारोबारी दिन, यानी सोमवार को भारतीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में ही मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना लगभग 1,400 रुपये प्रति 10…
हफ्ते के पहले कारोबारी दिन, यानी सोमवार को भारतीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में ही मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना लगभग 1,400 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो गया, वहीं चांदी के भाव भी 1,500 रुपये से ज्यादा टूट गए। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं के भाव मजबूत थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह डॉलर के मुकाबले रुपये का मजबूत होना और निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली है। जब रुपया मजबूत होता है, तो आयातित सोना और चांदी घरेलू खरीदारों के लिए सस्ते हो जाते हैं, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है।
सोने और चांदी के वायदा भाव
सोमवार को MCX पर 4 दिसंबर डिलीवरी वाले सोने का वायदा भाव शुरुआती कारोबार में 1,443 रुपये (0.95%) की गिरावट के साथ 1,50,056 रुपये प्रति 10 ग्राम के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में यह 1,51,499 रुपये पर बंद हुआ था। वहीं, दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी भी 1,552 रुपये (0.68%) फिसलकर 2,24,203 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर पर आ गई, जबकि पिछले सत्र में यह 2,25,755 रुपये पर बंद हुई थी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू कीमतों का अंतर
दिलचस्प बात यह है कि वैश्विक बाजार में सोना 4,200 डॉलर प्रति औंस के ऊपर और चांदी 61.1 डॉलर प्रति औंस पर मजबूती के साथ कारोबार कर रही थी। इसके बावजूद भारतीय बाजारों में कीमतें गिरीं। निवेशकों को उम्मीद है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया कदमों से रुपये में मजबूती आ सकती है, जिसका असर सोने-चांदी की कीमतों पर दिख रहा है।
आगे क्या हो सकता है?
विश्लेषकों के मुताबिक, सोने के लिए 1,50,000-1,50,700 रुपये का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट है। अगर यह स्तर टूटता है, तो भाव 1.48 लाख रुपये तक जा सकते हैं। वहीं, ऊपर की तरफ 1.52-1.53 लाख रुपये का स्तर एक बड़ी बाधा (रेजिस्टेंस) माना जा रहा है। चांदी के लिए 2.24 लाख रुपये का स्तर अहम है।
बाजार की नजर अब अमेरिका के मुद्रास्फीति के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति पर टिकी है। ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों के आकर्षण को कम करती हैं। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता जैसे कारक लंबे समय में सोने को एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में समर्थन दे सकते हैं।
इनपुट: IANS



