जानिए क्यों बचपन में ही लड़कियों को पहनाए जाते है 10 किलो वजनी छल्ले

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जानिए क्यों बचपन में ही लड़कियों को क्यों पहनाए जाते है 10 किलो वजनी छल्ले

जिराफ की गर्दन जानवरों में उसे अनोखा बनाती है. वैसे ही दुनिया में एक ऐसी जनजाति है. जो अपने गले को लेकर काफी अलग मानी जाती है. क्योंकि कुछ महिलाए है जो गले में पीतल के 10 किलों के छल्ले लगाकर रखती है. यह महिलाएं कयाह राज्य में रहती है. यही नहीं यह महिलाएं छल्लें इसलिए पहनती है ताकि उनकी गर्दन लम्बी नजर आए.

यहां बात हो रही है पाडुंग जनजाति के कयानी औरतों की. ये समुदाय बर्मा और उत्तर-पश्चिमी थाईलैंड की पहाड़ों में पाया जाता है. अगर आपको अभी भी नहीं समझ आया कि ये कौन हैं तो समान्यतया लोग इन्हें ‘जिराफ औरतों के नाम से ही जानते है. इस बारें में कई बार कहा भी जाता है और सुनाया भी गया होगा.

ऐसा कहा जाता है कि 11वीं शताब्दी में शूरू हुई यह प्रथा में यह प्रचलित है कि उस समय में जिन औरतों की गर्दन लम्बी हुआ करती थी उनसे पुरूष आकर्षित करते है. यह भी कहां जाता था कि इतना टार्चर सिर्फ पुरूषों को खुश करने या फिर यू कहें कि वह सुयोग्य पति को पाने के लिए सहती थी या फिर यू कहें कि अपने गले में इसलिए इतने भारी पीतल के छल्ले को गले में डालकर रखती थी.

वहीं दूसरी और कुछ लोगों का यह कहना है कि कुछ महिलाएं यह छल्ले इसलिए पहनती थी कि वह व्यापारियों को अपने से दूर रखने के लिए करती थी. ताकि उन्हें कोई खरीद ना पाए इसलिए छल्ले गले में पहने जाते थे. उन्हें सिर्फ पाडुंग समुदाय के पुरुष ही अपना सकते हैं.

इस प्रथा को बचपन से ही शुरू कर दिया जाता है. सबसे पहले छोटी बच्ची को एक पीतल का छल्ला पहनाया जाता है. इस समया बच्चियों को हड्डियां काफी नाजुक होती है. जैसे-जैसे लड़की बड़ी होती जाती है उसके गले में पड़े छल्लों की संख्या बढ़ती जाती है ताकि वो जिराफ जैसी गर्दन पा सके. इन्हें कुल 25 छल्ले पहनाए जाते हैं.

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इतना ही नहीं इस समुदाय की महिलाओं को यह पता ही नहीं है कि बगैर छल्ले के अपना खुद का शरीर कितना हल्का और प्यारा होता है.