नोएडा-ग्रेटर नोएडा: ट्रैफिक में अब नहीं फंसेगी एंबुलेंस, 1 नवंबर से शुरू हो रहा 'ऑपरेशन फास्ट'
उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में अब ट्रैफिक जाम की वजह से किसी गंभीर मरीज की जान खतरे में नहीं पड़ेगी। पुलिस कमिश्नरेट 1 नवंबर से 'ऑपरेशन फास्ट' नाम की एक विशेष पहल शुरू कर रहा है, जिसका मकसद…
उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में अब ट्रैफिक जाम की वजह से किसी गंभीर मरीज की जान खतरे में नहीं पड़ेगी। पुलिस कमिश्नरेट 1 नवंबर से 'ऑपरेशन फास्ट' नाम की एक विशेष पहल शुरू कर रहा है, जिसका मकसद एंबुलेंस को ट्रैफिक में फंसे बिना तेजी से अस्पताल तक पहुंचाना है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस व्यवस्था के लागू होने के साथ ही गौतमबुद्ध नगर ऐसा करने वाला उत्तर प्रदेश का पहला जिला बन जाएगा।
पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में शुरू की जा रही इस योजना का पूरा नाम 'फास्ट एम्बुलेंस सीमलेस ट्रांजिशन' है। इसका मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटना में घायल, ट्रॉमा या गंभीर रूप से बीमार मरीजों को जल्द से जल्द जीवन रक्षक उपचार उपलब्ध कराना है।
कैसे काम करेगा 'ऑपरेशन फास्ट'?
इस योजना के लिए ट्रैफिक पुलिस कंट्रोल रूम में एक समर्पित 'एंबुलेंस ट्रैफिक सेल' बनाया गया है, जो 24 घंटे काम करेगा। इसके लिए एक हेल्पलाइन नंबर 9218981716 भी जारी किया गया है।
प्रक्रिया इस तरह होगी: जब भी किसी मरीज को ले जा रही एंबुलेंस को ट्रैफिक क्लीयरेंस की जरूरत होगी, तो एंबुलेंस का ड्राइवर, अस्पताल या डिस्पैच सेंटर इस हेल्पलाइन पर सूचना देगा। सूचना में एंबुलेंस की मौजूदा लोकेशन, गंतव्य अस्पताल और रूट की जानकारी दी जाएगी।
यह जानकारी मिलते ही ट्रैफिक सेल उस रास्ते पर तैनात पुलिसकर्मियों को तुरंत अलर्ट कर देगा। इसके बाद 'रोलिंग ट्रैफिक क्लीयरेंस मैकेनिज्म' के तहत एंबुलेंस के पहुंचने से पहले ही आगे के चौराहों पर ट्रैफिक को नियंत्रित कर रास्ता साफ किया जाएगा। इसके लिए ट्रैफिक सिग्नल बदलने से लेकर पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए वाहन चालकों को सूचित करने जैसे कदम उठाए जाएंगे।
सफल रहा ट्रायल रन
इस व्यवस्था को लागू करने से पहले पुलिस ने इसका एक ट्रायल रन भी किया था। ट्रायल के दौरान, व्यस्त समय में एक खाली एंबुलेंस ने चिल्ला बॉर्डर से मैक्स हॉस्पिटल और फोर्टिस हॉस्पिटल तक करीब 12 किलोमीटर की दूरी सिर्फ 10 मिनट में तय की। यह ट्रायल सामान्य यातायात को रोके बिना सफल रहा, जिससे इस प्रणाली की प्रभावशीलता साबित हुई।
पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) शैव्या गोयल ने एक रिसर्च के बाद इस योजना का प्रस्ताव तैयार किया है। इस पहल में जिले के 72 सरकारी व निजी अस्पतालों, 108 एंबुलेंस सेवा और अन्य एंबुलेंस सेवा प्रदाताओं को जोड़ा गया है। पुलिस का कहना है कि यह पहल 'जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट' (शून्य मृत्यु वाला जिला) की अवधारणा को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इनपुट: IANS



