1993 मुंबई धमाके: गैंगस्टर अबू सलेम की समय-पूर्व रिहाई की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज
1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट के दोषी गैंगस्टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने गुरुवार को उसकी याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने…
1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट के दोषी गैंगस्टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने गुरुवार को उसकी याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने अपनी समय से पहले रिहाई की मांग की थी। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शीर्ष अदालत ने इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।
सलेम ने पुर्तगाल से अपने प्रत्यर्पण की शर्तों का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उसकी दलील थी कि भारत सरकार ने आश्वासन दिया था कि उसे 25 साल से अधिक की सजा नहीं दी जाएगी। उसका दावा था कि हिरासत में बिताए गए समय और जेल में मिली छूट को मिलाकर उसने 25 साल की अवधि पूरी कर ली है, इसलिए उसे रिहा किया जाना चाहिए।
क्या है सजा की अवधि पर विवाद?
अबू सलेम का मुख्य तर्क यह था कि अगर मुकदमे के दौरान की हिरासत, सजा के बाद की हिरासत और अच्छे व्यवहार के लिए मिली छूट को एक साथ गिना जाए, तो उसने 31 मार्च, 2025 तक 25 साल का समय पूरा कर लिया है। हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा था कि उसकी याचिका समय से पहले दायर की गई है और उसकी 25 साल की सजा 2030 में पूरी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इसी फैसले को सही ठहराया। इससे पहले, 27 जुलाई को शीर्ष अदालत ने सलेम की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
पृष्ठभूमि और प्रत्यर्पण
अबू सलेम को 2002 में पुर्तगाल में गिरफ्तार किया गया था। एक लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, उसे 2005 में भारत प्रत्यर्पित किया गया। यहां उस पर TADA के तहत दो मामलों में मुकदमा चला। इनमें से एक मामला 1993 के मुंबई धमाकों से संबंधित था। इन दोनों मामलों में उसे क्रमशः 25 फरवरी, 2015 और 7 सितंबर, 2017 को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
इनपुट: IANS



