सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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उमर खालिद के पिता ने कहा: जब तक आरोप साबित न हों, 'फ्री उमर' के नारे लगाना गैर-कानूनी नहीं

दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में लगे 'फ्री उमर खालिद' और 'फ्री शरजील इमाम' के नारों पर उमर खालिद के पिता सैयद कासिम रसूल इलियास ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जब तक…

उमर खालिद के पिता ने कहा: जब तक आरोप साबित न हों, 'फ्री उमर' के नारे लगाना गैर-कानूनी नहीं
(फोटो: IANS)

दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में लगे 'फ्री उमर खालिद' और 'फ्री शरजील इमाम' के नारों पर उमर खालिद के पिता सैयद कासिम रसूल इलियास ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जब तक अदालत में कोई आरोप सिद्ध नहीं हो जाता, तब तक किसी की रिहाई के लिए आवाज़ उठाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आता है और इसमें कुछ भी गैर-कानूनी नहीं है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, उन्होंने इस मुद्दे को कानूनी और संवैधानिक अधिकारों से जोड़ा।

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सैयद कासिम रसूल इलियास ने तर्क दिया, "यह किसी व्यक्ति की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है कि वह बेल की मांग करे या किसी की रिहाई की मांग उठाए।" उन्होंने सवाल उठाया कि जब बड़े-बड़े मामलों में आरोप सिद्ध होने के बाद भी लोगों को जमानत मिल जाती है, तो उमर खालिद और शरजील इमाम के मामलों में, जहां आरोप साबित नहीं हुए हैं, उनके समर्थन में नारे लगाने में क्या आपत्ति हो सकती है। उनके मुताबिक, "अगर कोई लिखता है 'फ्री उमर खालिद' या 'फ्री शरजील इमाम' तो इसमें संवैधानिक या कानूनी रूप से क्या गलत है?"

छात्र राजनीति और महिला भागीदारी

छात्रसंघ में छात्राओं की भूमिका पर बात करते हुए उन्होंने महिला प्रतिनिधित्व का पुरजोर समर्थन किया। इलियास ने कहा, "छात्राओं को भी छात्रसंघ में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उन्हें भी समान अधिकार हैं।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि छात्र और छात्राओं के अधिकारों में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए और अगर कोई छात्रा अध्यक्ष या उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ती है तो किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार, छात्र राजनीति में लड़कियों की बढ़ती भागीदारी समुदाय और देश के लिए एक अच्छा संकेत है, जो उनके सशक्त होने और अपनी पहचान के साथ आगे आने को दर्शाता है।

बुर्का और हिजाब पर बहस

बुर्का और हिजाब से जुड़े विवादों पर टिप्पणी करते हुए इलियास ने कहा कि भारत में यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। उन्होंने कहा, "अगर कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्राएं बुर्का या हिजाब पहनकर जाती हैं और अपना पूरा शरीर ढकती हैं तो उसमें क्या ऐतराज है?" उन्होंने "मेरा जिस्म, मेरी मर्जी" के नारे का जिक्र करते हुए कहा कि अगर मुस्लिम छात्राएं अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शालीन वस्त्र पहनना चाहती हैं, तो इस पर भी किसी को ऐतराज नहीं होना चाहिए। उन्होंने फ्रांस जैसे देशों में लगे प्रतिबंधों को अनुचित ठहराया और कहा कि सुरक्षा जांच के लिए महिला कर्मियों द्वारा अलग से व्यवस्था की जा सकती है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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