तूतीकोरिन: मुफ्त आवास योजना की ज़मीन पर कब्ज़ा, मद्रास हाईकोर्ट ने कलेक्टर को किया तलब
तमिलनाडु की मुफ्त आवास-स्थल योजना में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहाँ सरकार ने ऐसी ज़मीनों के पट्टे जारी कर दिए जो पहले से ही अवैध कब्ज़े में थीं। इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए मद्रास…
तमिलनाडु की मुफ्त आवास-स्थल योजना में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहाँ सरकार ने ऐसी ज़मीनों के पट्टे जारी कर दिए जो पहले से ही अवैध कब्ज़े में थीं। इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने तूतीकोरिन (थूथुकुडी) के जिला कलेक्टर को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जवाब देने का आदेश दिया है।
यह मामला तूतीकोरिन जिले के कोविलपट्टी का है, जहाँ 2002 में 280 ज़रूरतमंद लोगों को घर बनाने के लिए मुफ्त ज़मीन के पट्टे दिए गए थे। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, जब कई लाभार्थियों ने 20 साल तक निर्माण नहीं किया तो उनके पट्टे रद्द कर 118 नए लोगों को ज़मीन आवंटित कर दी गई। लेकिन जब इनमें से 21 लाभार्थियों ने इस साल जनवरी में निर्माण शुरू करना चाहा, तो उन्हें कथित तौर पर कब्ज़ा करने वालों ने धमकाया और काम करने से रोक दिया।
अदालत की अधिकारियों को फटकार
जस्टिस वेलमुरुगन और जस्टिस रामकृष्णन की बेंच ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए। अदालत ने कहा, "इस योजना के तहत जमीन उन गरीब और जरूरतमंद लोगों को आवंटित की जाती है जिनके पास घर बनाने के लिए घर या जमीन नहीं है। जमीन आवंटित करने से पहले क्या अधिकारियों को जमीन की मौजूदा स्थिति की जांच नहीं करनी चाहिए थी? अगर उन जमीनों के लिए पट्टे जारी किए जाते हैं, जिन पर कब्जा है, तो लाभार्थी वहां घर कैसे बना सकते हैं?"
याचिका में क्या कहा गया?
यह मामला इलुप्पैयुरानी निवासी अंबुराज की याचिका पर सुनवाई के लिए आया था। याचिका में आरोप लगाया गया कि जिला कलेक्टर और पुलिस से शिकायत के बावजूद अवैध कब्ज़ा हटाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं हुई। याचिकाकर्ता ने चिंता जताई कि अगर नियम के मुताबिक एक साल के भीतर घर नहीं बने, तो नए लाभार्थियों के पट्टे भी रद्द हो जाएँगे। इसलिए, उन्होंने अदालत से कब्ज़ा हटाने का निर्देश देने की मांग की।
सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने दावा किया कि कब्ज़े हटा दिए गए हैं, लेकिन अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया और सरकार का जवाबी हलफनामा दायर करने का अनुरोध भी ठुकरा दिया। अदालत ने अब कलेक्टर को सोमवार को होने वाली अगली सुनवाई में सभी दस्तावेजों के साथ व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।
इनपुट: IANS



