रविवार, 1 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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फ्रांस के प्रदर्शनों में हिंसा भड़काने वाले नकाबपोश कौन हैं? जानिए 'कैसर्स' के बारे में

फ्रांस में महंगाई और सरकारी नीतियों के खिलाफ लगातार तीसरे सप्ताहांत हुए व्यापक प्रदर्शनों के बीच, शांतिपूर्ण रैलियों को हिंसा में बदलने वाले नकाबपोश समूहों पर ध्यान केंद्रित हो गया है। फ्रांसीसी भाषा…

फ्रांस के प्रदर्शनों में हिंसा भड़काने वाले नकाबपोश कौन हैं? जानिए 'कैसर्स' के बारे में
(फोटो: IANS)

फ्रांस में महंगाई और सरकारी नीतियों के खिलाफ लगातार तीसरे सप्ताहांत हुए व्यापक प्रदर्शनों के बीच, शांतिपूर्ण रैलियों को हिंसा में बदलने वाले नकाबपोश समूहों पर ध्यान केंद्रित हो गया है। फ्रांसीसी भाषा में 'कैसर्स' (Casseurs) कहे जाने वाले इन उपद्रवियों की कोई संगठित पहचान नहीं है, लेकिन ये अक्सर विरोध प्रदर्शनों के अंत में पुलिस के साथ हिंसक झड़पों और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के लिए सामने आते हैं।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ये समूह किसी पंजीकृत संगठन या राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हैं, बल्कि कट्टर वामपंथी विचारधारा से प्रभावित छोटे-छोटे गुटों में सक्रिय रहते हैं। 'कैसर्स' का शाब्दिक अर्थ 'तोड़फोड़ करने वाले' होता है। विश्लेषकों का मानना है कि इनमें मुख्य रूप से युवा कार्यकर्ता शामिल होते हैं, जिन्हें कई बार 'अल्ट्रा-लेफ्ट' समूहों से भी जोड़ा जाता है।

प्रदर्शनों में हिंसा का पैटर्न

फ्रांस में हालिया प्रदर्शनों में एक जैसा पैटर्न देखा गया है। 31 अक्टूबर को भी देशभर में लगभग 3.20 लाख लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाई, जिनमें से करीब 70 हजार अकेले पेरिस में थे। हालांकि, पेरिस के पोर्टे डी शारांटों इलाके में काले कपड़े पहने दर्जनों नकाबपोश लोगों ने पुलिस पर पथराव किया और एक आग लगाने वाला उपकरण भी फेंका। अधिकारियों ने पेरिस में 400 से 800 कट्टरपंथी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी की आशंका जताई थी। जवाब में पुलिस ने आंसू गैस, स्टन ग्रेनेड और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया।

इन समूहों की कार्यप्रणाली में पहचान छिपाने के लिए नकाब, चश्मे और काले कपड़ों का इस्तेमाल आम है। 'द लोकल' की एक पड़ताल के मुताबिक, इनके पास से हथौड़े, आतिशबाजी और पेट्रोल बम बनाने की सामग्री भी बरामद हुई है। ये अक्सर बैंकों, रियल एस्टेट दफ्तरों और बड़े कारोबारी प्रतिष्ठानों को अपना निशाना बनाते हैं।

क्या है विरोध की वजह?

फ्रांस में यह विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से बढ़ती महंगाई, जीवनयापन के संकट, आर्थिक असमानता और सार्वजनिक सेवाओं की गिरती गुणवत्ता के खिलाफ शुरू हुआ था। इसमें छात्र, ट्रेड यूनियन और 'येलो वेस्ट' आंदोलन से जुड़े लोग भी शामिल हैं। हालांकि, पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के घायल होने के बाद आंदोलन में नागरिक स्वतंत्रता और विरोध के अधिकार की मांग भी जुड़ गई है।

31 अक्टूबर के प्रदर्शन हैलोवीन के त्योहार के साथ हुए, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नई चुनौती पेश की। कई प्रदर्शनकारी पहचान छिपाने के लिए स्पाइडरमैन और फ्रैंकेंस्टाइन जैसे किरदारों के मुखौटे पहने नजर आए। इस बीच, गृह मंत्रालय के अनुसार, 31 अक्टूबर दोपहर तक 511 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जो पिछले सप्ताह हुई 217 गिरफ्तारियों से काफी ज्यादा है। छात्र संगठनों ने नवंबर के पहले सप्ताह में शिक्षण संस्थानों को बंद रखने और 5 नवंबर को एक और बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया है।

इनपुट: IANS

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