फ्रांस: हिंसक प्रदर्शनों के बाद कर्फ्यू से हालात काबू में, सरकार ने सुरक्षाबलों का आभार जताया
फ्रांस के कई शहरों में हुए हिंसक प्रदर्शनों और झड़पों के बाद प्रशासन द्वारा लगाए गए कर्फ्यू से हालात काफी हद तक नियंत्रण में आ गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस के प्रधानमंत्री…
फ्रांस के कई शहरों में हुए हिंसक प्रदर्शनों और झड़पों के बाद प्रशासन द्वारा लगाए गए कर्फ्यू से हालात काफी हद तक नियंत्रण में आ गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने शांति व्यवस्था कायम करने में भूमिका निभाने के लिए पुलिस, सुरक्षाकर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों का धन्यवाद किया है।
प्रधानमंत्री लेकोर्नू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "लक्षित क्षेत्रों में लगाए गए कर्फ्यू की वजह से पिछली रात हालात काफी हद तक शांत रहे।" उन्होंने कर्फ्यू को प्रभावी ढंग से लागू कराने के लिए सुरक्षा बलों और सक्रियता से अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।
ज़रूरत के हिसाब से लगेंगे नए कर्फ्यू
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह सख्ती जारी रहेगी। प्रधानमंत्री के मुताबिक, सोमवार शाम से ही कुछ इलाकों में लूटपाट की घटनाओं के बाद आंशिक कर्फ्यू के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने अपने पोस्ट में आगे लिखा, "आज रात भी जिन इलाकों में जरूरत होगी, वहां नए कर्फ्यू लगाए जाएंगे।" यह फैसले स्थानीय स्तर पर लिए जाएंगे, जहां प्रशासनिक अधिकारी और मेयर मिलकर ज़मीनी हालात का आकलन करेंगे। सरकार ने ज़रूरत पड़ने पर आपातकाल लागू करने की संभावना से भी इनकार नहीं किया है।
व्यापक प्रदर्शन और गिरफ्तारियां
यह प्रशासनिक कार्रवाई सप्ताह के अंत में हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बाद हुई है। फ्रांस के गृह मंत्रालय द्वारा रविवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को हुए इन प्रदर्शनों में करीब 5,50,000 लोगों ने हिस्सा लिया था। हिंसा की घटनाओं के बीच कुल 2,397 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन झड़पों में 997 पुलिस अधिकारी और जवान भी घायल हुए, जिनमें से सात की हालत गंभीर है।
सिन्हुआ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया है कि सितंबर से ही फ्रांस में छात्र बेहतर शिक्षा सुविधाओं और पढ़ाई के माहौल में सुधार की मांग को लेकर कई बड़े प्रदर्शन कर चुके हैं। यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जब देश में महंगाई, ईंधन की कीमतों, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
इनपुट: IANS



