बोलने की सलाह देने वाले अब ख़ुद तो कुछ बोलें- पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

यूपीए की सरकार में 10 साल तक प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह का कार्यकाल कई वजहों से चर्चा में रहा. लेकिन सबसे ज़्यादा बात उनके बात न करने पर ही होती थी. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर आरोप लगे कि वो बहुत कम बोलते हैं. हालांकि उन्होंने इन आरोपों को खंडित भी किया. लेकिन वक़्त बदला, सरकार बदली और अपनी वाक कला के दम पर नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बन गए. पीएम मोदी की खासियत है उनके बोलने की कला. वो अपने हर भाषण में विरोधियों के छक्के छुडा देते हैं और जनता को उनकी यही अदा बहुत पसंद आती है. पर इस बार वो अपने बोलने की नहीं बल्कि न बोलने की वजह से चर्चा में हैं.

उन्नाव और कठुआ गैंगरेप मामलों पर काफी लम्बे समय तक चुप रहने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने निशाना साधा है. मनमोहन सिंह का कहना है कि बोलने की जो सलाह मोदी जी उन्हें दिया करते थे, अब मोदी जी को वह सलाह खुद पर आज़मानी चाहिए.

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान मनमोहन सिंह ने पीएम मोदी के लिए कहा, “उन्हें अपनी उस सलाह को खुद फॉलो करना चाहिए जो वो मुझे देते थे, और अधिक बोलें.” पूर्व प्रंधानमंत्री ने कहा कि वे खुश हैं कि आखिरकार पिछले शुक्रवार भीमराव अंबेडकर की जयंती पर उन्होंने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि भारत की बेटियों को न्याय ज़रूर मिलेगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.”

वहीं, जब मनमोहन सिंह से यह पूछा गया कि आप बीजेपी के उस व्यवहार को क्या कहेंगे, जब वे आप पर तंज़ कसते हुए आपको मौनमोहन सिंह बुलाते थे. इस पर पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, “इस प्रकार की टिप्पणियों के साथ पूरी ज़िंदगी रहेंगे, लेकिन मुझे लगता है कि पीएम नरेंद्र मोदी को वो सलाह माननी चाहिए जो वो अक्सर मुझे देते थे. मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला कि वे मेरे न बोलने की आलोचना करते थे. मैं यह महसूस करता हूं कि जो सलाह वे मुझे दे रहे थे, उस पर उन्हें खुद अमल करना चाहिए.”

इसके बाद मनमोहन सिंह ने कहा, “मुझे लगता है कि जो प्रशासन में होते हैं, उन्हें समय पर अपने अनुयायियों की अगुआई करने के लिए बोलना चाहिए.”  बता दें कि साल 2012 दिल्ली गैंगरेप के दौरान जब कांग्रेस की सरकार थी, तब बीजेपी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के चुप रहने को लेकर उन पर काफी तंज कसे थे. इस पर मनमोहन सिंह ने कहा कि दिल्ली गैंगरेप में कांग्रेस पार्टी और उनकी सरकार द्वारा रेप जैसे अपराध को लेकर कानून में जो बदलाव किया जा सकता था और जो कार्रवाई की जा सकती थी, वो उन्होंने की थी.