Faridabad News: दोस्त का साथ मिला तो जीत ली कोरोना से लड़ाई, मित्रता दिवस पर सुनिए यह रोचक कहानी

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Faridabad News: दोस्त का साथ मिला तो जीत ली कोरोना से लड़ाई, मित्रता दिवस पर सुनिए यह रोचक कहानी

सुनील गौड़, फरीदाबाद: दोस्ती। यह शब्द जितना छोटा है, इसकी अहमियत उतनी ही बड़ी है। कहते हैं कि इंसान के दिल का हर राज उसके दोस्त के पास दफन होता है। वह जो अपने मां-बाप, भाई-बहन और पत्नी से नहीं कह सकता, वह सब उसका दोस्त जानता है। हर मुश्किल में वह अपने दोस्त को याद करता है और उसका मित्र एक बार पुकारने पर दौड़ा चला आता है। दोस्त वही है, जो आप से ज्यादा आपको समझता है। आज फ्रेंडशिप डे पर हम कुछ ऐसे ही दोस्तों की कहानी लेकर आए हैं…

2021 का अप्रैल चल रहा था। कोरोना की दूसरी लहर से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा था। सोशल मीडिया से लेकर टीवी चैनल और अखबारों में इस महामारी के विनाशक रूप की खबरें आ रही थीं। जरा-सी सर्दी-खांसी होने पर अपने भी पास उठना-बैठना छोड़ देते थे। इसी दौरान ग्रीनफील्ड कॉलोनी में रहने वाले युगल किशोर अरोड़ा भी इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आ गए। यूं तो उनका परिवार भरा-पूरा है, लेकिन जब वह इस दौर से गुजर रहे थे तब उनके साथ कोई नहीं था, क्योंकि उनकी पत्नी अंजू अरोड़ा आगरा गई थीं और उनके दोनों बेटे देव कुमार और सचिन अरोड़ा बेंगलुरू में थे। वे यहां आने में असमर्थ थे। ऐसे में युगल किशोर अकेले इस लड़ाई में थे। हालत बिगड़ती देख उनकी कंपनी इंडियन ऑयल कंपनी के डॉक्टरों उन्हें अस्पताल में भर्ती होने तक को कह दिया।

दोस्त के साथ मिलकर जीती कोरोना की लड़ाई
जब किसी अस्पताल में उन्हें बेड नहीं मिला तो उनकी चिंता बढ़ने लगी। उन्होंने कुछ लोगों से मदद भी मांगी, लेकिन सबने मुंह फेर लिया। इस दौरान उनकी हालत के बारे में उनके दोस्त विरेंद्र भड़ाना उर्फ बिंदे को पता चला तो वह तुरंत उनके पास आए। सबसे पहले उन्होंने युगल किशोर का ढांढस बंधाया, फिर उनकी दवाइयां शुरू कराईं। इसके बाद विरेंद्र रोज सुबह-शाम युगल किशोर के पास खाना लेकर जाते थे और घंटों उनके पास ही बैठे थे। इस तरह उन्होंने अपने दोस्त के साथ मिलकर कोरोना से लड़ाई जीती।

युगल किशोर मूलरूप से यूपी के आगरा के रहने वाले हैं। वह इसी जून में साल इंडियन ऑयल कंपनी से जीएम (फाइनैंस) पद से रिटायर्ड हुए हैं। वह बताते हैं कि विरेंद्र से उनकी दोस्ती 7 साल हुई थी, लेकिन इस पर गहराई का रंग कोरोना काल में चढ़ा। उन्होंने कहा कि उन्हें दोस्ती के मायने पिछले साल अप्रैल में समझ आया। दरअसल, मैं एक अच्छे पद पर होने के नाते दूसरे को अधिक महत्व नहीं देता था। विरेंद्र कहते हैं, मैं दिन में 3 बार फोन करके उसने हालचाल पूछता था। वह मकान में अकेले थे। बीमारी में वक्त काटना कठिन था, लेकिन मैंने दोस्त को अकेलापन महसूस नहीं होने दिया। उनसे हंसी की बातें करता था, ताकि वह खुशहाल रहें।

दिल्ली से ऑक्सिजन सिलिंडर ले ग्रेनो पहुंचे शंभूनाथ
सेक्टर-137 के गुलशन विवांते सोसायटी के शंभूनाथ चौधरी के पारिवारिक मित्र रविंद्र कुमार की पत्नी को कोरोना हो गया। उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी। हॉस्पिटल में बेड नहीं मिल रहा था तो रविंद्र ने उनसे मदद मांगी। फायर सेफ्टी का बिजनेस करने वाले शंभूनाथ को मेडिकल ऑक्सिजन नहीं मिला तो वे दिल्ली से सिलिंडर की व्यवस्था कर अल्फा 2 ग्रेटर नोएडा के पार्श्वनाथ इडेंस में रहने वाले रविंद्र कुमार के घर पहुंचे। धीरे-धीरे पीड़िता ने रिकवर कर लिया।

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मित्र की मदद से हॉस्पिटल में हुए भर्ती
दूसरी लहर के दौरान कोरोना के गंभीर मरीजों को भी हॉस्पिटल में जगह नहीं मिल रहा था। वह समय याद कर सेक्टर-78 आदित्य अर्बन कासा सोसायटी के अमित शर्मा सिहर जाते हैं। 12 अप्रैल 2021 को उन्हें कोरोना हो गया। वे घर पर ही दवा कर रहे थे। 16 अप्रैल को सांस लेने में दिक्कत हुई और ऑक्सिजन लेवल 90 से नीचे जाने लगा। उन्होंने एडमिट होने के लिए कई कोविड हॉस्पिटल से संपर्क किया, लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिला। जबकि वह खुद फॉर्मा कंपनी में सेल्स मैनेजर हैं। उन्होंने अपने मित्र धर्मेंद्र शर्मा से संपर्क किया। उन्होंने तत्काल सेक्टर 34 के मानस हॉस्पिटल में भर्ती कराकर ऑक्सिजन सपोर्ट दिलवाया। 4 दिन में भी सुधार नहीं हुआ तो सेक्टर 11 के मेट्रो हॉस्पिटल में रेफर कराया। 1 महीने एडमिट रहे, फिर सही हो गए। अपनी नई जिंदगी का श्रेय वे दोस्त धर्मेंद्र को देते हैं।

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