सेना ने कोर कमांडर को हटाने वाले दस्तावेज़ को बताया AI-निर्मित फ़र्ज़ीवाड़ा, कहा- यह पाकिस्तान का दुष्प्रचार
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक कथित सैन्य दस्तावेज़ को भारतीय सेना ने पूरी तरह से फ़र्ज़ी और AI की मदद से बनाया गया बताया है। इस जाली दस्तावेज़ में दावा किया गया था कि 15वीं कोर के जनरल ऑफिसर…
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक कथित सैन्य दस्तावेज़ को भारतीय सेना ने पूरी तरह से फ़र्ज़ी और AI की मदद से बनाया गया बताया है। इस जाली दस्तावेज़ में दावा किया गया था कि 15वीं कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC), लेफ्टिनेंट जनरल बलबीर सिंह को उनके पद से हटा दिया गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, सेना ने इसे पाकिस्तान समर्थित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स द्वारा फैलाया गया एक सुनियोजित दुष्प्रचार करार दिया है।
वायरल दस्तावेज़ में लेफ्टिनेंट जनरल बलबीर सिंह को तत्काल प्रभाव से मुख्यालय में रिपोर्ट करने का आदेश दिए जाने का झूठा दावा किया गया था। सेना ने स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई भी आदेश जारी नहीं किया गया है और यह दस्तावेज़ पूरी तरह से निराधार है। अधिकारियों ने दस्तावेज़ की भाषा, प्रारूप और अन्य विवरणों में कई विसंगतियों की ओर भी ध्यान दिलाया, जो इसके जाली होने का प्रमाण हैं।
दुष्प्रचार का पैटर्न और आतंकी की मौत का कनेक्शन
सेना के मुताबिक, यह घटना एक खास तरह के दुष्प्रचार पैटर्न का हिस्सा है। इसके तहत पहले फ़र्ज़ी दस्तावेज़ बनाए जाते हैं, फिर उनके समर्थन में तर्क गढ़े जाते हैं और अंत में उन्हें नकली आधिकारिक प्रारूप में कई सोशल मीडिया अकाउंट्स से एक साथ फैलाया जाता है। इस मामले में पाकिस्तान समर्थित प्रॉपेगेंडा अकाउंट्स ने इस फ़र्ज़ी दस्तावेज़ को एक पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी की कथित प्रेस कॉन्फ्रेंस से जोड़ने की कोशिश की, ताकि यह माहौल बनाया जा सके कि अधिकारी को उस प्रेसवार्ता के बाद हटाया गया है।
यह दुष्प्रचार 29 सितंबर को हुई एक बड़ी सैन्य कार्रवाई के बाद तेज़ हुआ। उस दिन भारतीय सेना ने एक संयुक्त अभियान में पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी मोहम्मद आसिफ उर्फ़ हाशिम मूसा को बडगाम के यूसमर्ग इलाके में मार गिराया था। इसी घटना के बाद सोशल मीडिया पर यह फ़र्ज़ी दस्तावेज़ वायरल किया गया।
एक साथ सक्रिय हुए कई पाकिस्तानी हैंडल्स
जांच में यह भी सामने आया है कि कई पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल्स ने लगभग एक ही समय पर एक जैसी सामग्री प्रसारित की। सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी इन खातों की जानकारी दी गई है, जिनमें रिटर्नबाबाएस, शैडोफॉक्स 11, रिमलैंड इंटेल, खोरासानघाग, और उथमानरूमी 2025 जैसे हैंडल्स शामिल हैं। IANS के अनुसार, इन खातों से रात 9:22 से 11:22 बजे के बीच एक जैसे संदेश फैलाए गए, जिसका मकसद भारतीय सशस्त्र बलों को लेकर भ्रम पैदा करना था।
सेना ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर दिखने वाले ऐसे किसी भी दावे या दस्तावेज़ को बिना पुष्टि के साझा न करें। विशेषकर सैन्य अधिकारियों और सुरक्षा से जुड़े मामलों में केवल आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों पर ही भरोसा करने की सलाह दी गई है।
इनपुट: IANS



