Exclusive: बेटी को मिली धमकी से बुरी तरह डर गई थीं काम्या पंजाबी, बोलीं- कहीं अकेले नहीं जाने देती

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Exclusive: बेटी को मिली धमकी से बुरी तरह डर गई थीं काम्या पंजाबी, बोलीं- कहीं अकेले नहीं जाने देती

टीवी की जानी-मानी एक्ट्रेस काम्या पंजाबी को एंटरटेनमेंट की दुनिया में तकरीबन दो दशक से ज्यादा का समय हो गया है। हर तरह की भूमिकाओं में रंग भर चुकी काम्या पंजाबी अपनी निडरता और बेबाकी के लिए भी जानी जाती हैं। इन दिनों वह टीवी शो ‘संजोग’ के कारण एक बार फिर चर्चा में हैं। उनसे एक खास बातचीत:

इस शो से जुड़ने के पीछे आपकी सोच क्या है?
मैं इस रोल को पाकर बहुत खुश हूं। बहुत ही दमदार रोल है। मेरा जो किरदार है वो जिंदगी को जीना जानती है। मेरे खुद की लाइन है कि मैं किसी के बाप से नहीं डरती, तो मेरा गौरी का किरदार ऐसा ही है। गौरी अपने सपने को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। जिद्दी है, प्यार भी करती है अपने परिवार से और रोमांस भी है उसमें। काम भी करती है, फैमिली भी संभालती है। सच कहूं तो अब तक जितनी भी भूमिकाएं मुझे मिली हैं, उनके लिए इतना ग्रैटिट्यूड और शुक्राना निकलता है कि बता नहीं सकती। मेरी भूख ही यही है कि मुझे अच्छे रोल्स मिले। करके अगर सीन अच्छा नहीं होता तो मुझे नींद नहीं आती। में काफी पैशनेट हूं अपने काम को लेकर। पता नहीं किसकी दुआ है या ऊपर वाले का हाथ है सिर पर कि बैक टू बैक किरदार मिलते रहते है। मेहनत का ही नतीजा है कि आई हूं ‘संजोग’ में।


अपनी भूमिकाओं की तरह निजी जिंदगी में भी आप अपनी राय बेबाकी से रखती हैं। इतनी हिम्मत कहां से लाती हैं?
जब भी कुछ गलत होते हुए देखती हूं वह हिम्मत ऑटोमेटिकली मेरे अंदर आ जाती है। मगर जब बात मेरी बेटी पर आती है, तब में डर जाती हूं। एक बार ऐसा किस्सा हुआ था, जब मैंने किसी के लिए आवाज उठाई थी और मुझे धमकियां मिली थीं कि तुम्हारी बेटी स्कूल यहीं से जाती है न। जब बच्चे पर बात आई तब मैं सिर्फ एक मां थी। तब मैं बहुत डर गई थी।

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आप कैसी मां है? मेरा मतलब सख्त हैं या नरम?
ये एक चैलेंज है। मुझे लगता है, ये अनवरत संघर्ष है। हर उम्र में बच्चे की रिक्वायरमेंट बदलती जाती है। अब जैसे ही वह 4-5 साल की हुई, तो बैड टच और गुड टच के बारे में बताना पड़ता है। बताना पड़ता है कि कोई उसे किस ना करे, यहां-वहां टच ना करे। फिर और थोड़े बड़े हों, तो सब कुछ समझाना पड़ता है। हर मां अपने बच्चे को लेकर प्रोटेक्टिव होती है और में एक सिंगल मां रही हूं। मैं उसे कभी अकेले जाने नहीं देती। वह कभी अपने दोस्तों के साथ जाती है, तो कभी अपनी नानी साथ होती है। 12 साल की हुई, तो उसे बॉडी के चेंजेज के बारे में बताना होगा।

‘संजोग’ शो मां और बेटी के रिश्ते पर है,आपने अपनी मां से क्या सीख ली?
मेरी मां एक मजबूत महिला रही हैं। उन्होंने अपने जीवन में कभी हार नहीं मानी और यही मैंने अपनी मां से सीखा कि कभी हार मत मानो। मुझे याद है, मैं जब छोटी सी थी तो मैं बीमार भी बहुत रहती थी। एक उल्टी हो जाने से मैं डर जाती थी और कहने लगती कि मुझे हॉस्पिटल ले चलो। वरना मुझे कुछ हो जाएगा। उस वक्त मुझे मां की बात याद आ जाती कि तू बहुत स्ट्रॉन्ग है, तुझे किसी हाल में हारना नहीं है। उनका यह सबक मेरी जिंदगी का मूलमंत्र बन गया। उनकी दी हुई हिम्मत ही थी, जो अपनी पहली शादी से मैं बाहर निकली।अपनी बहनों की शादी करवाई। मैंने सभी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया।


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वो कैसा दौर था जब आप पहली अब्यूजिव शादी से अलग हो रही थीं? क्या वो मुश्किल दौर था?
बिलकुल भी टफ नहीं था वो। उस वक्त मैं बहुत क्लियर थी कि मेरी बेटी इस माहौल में बड़ी नहीं होगी। मैंने अपनी शादी में सारे मौके दे दिए थे, शादी सब करके देखा था पर एक समय ऐसा आया, जब मुझे लगा कि नही ये मेरे बच्चे के लिए सही नही है। मेरे बेटी मेरे लिए सबसे ऊपर है। सबसे अहम है। जब मैं उसके बारे में सोच कर कोई फैसला लेती हूं, तो वो सबसे आसान हो जाता है।

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अब शलभ डांग से दूसरी शादी करके खुद को कंप्लीट महसूस करती हैं?
मैं कभी भी इनकंप्लीट फील नहीं करती। मेरे बेटी और में एक दूसरे को कंप्लीट करते हैं। मेरे लिए कंप्लीट की डेफिनेशन यह नहीं होती कि शादी और बच्चा हो। हां, खुश हूं कि प्यार आया है, जिंदगी में। एक साथी है, जो अच्छा है और सपोर्ट करता है तो यह फीलिंग तो अच्छी ही होती है। अब सही मायनों में प्यार हुआ है, पहले तो शायद बचपना था। जब वो मुझे मिले थे, तो उन्होंने मेरी लाइफस्टाइल देख ली थी। उन्होंने मेरा हेड स्ट्रांग एटीट्यूड भी देख लिया था। यह कहीं भी लड़ने को तैयार हो जाती है। यह सब बातों को लोग जो नेगेटिव तौर पर लेते हैं। उन्हें यही बात पसंद आयी थी। उनके आने से जिंदगी में ठहराव आ गया है। यह विश्वास कभी भी नहीं था कि हालात चाहे जो भी हो एक इंसान है जो हमेशा मुझे सपोर्ट करेगा।अब यह विश्वास है।

आपके हिसाब से हम सब औरतों की सबसे बड़ी दिकत क्या है?
औरतों की सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि वे अड्जेस्ट करती हैं, अपने लिए कदम नही उठाती। शादी की मर्यादा के लिए चुप रहती हैं कि शादी हो गई न अब क्या? सिर्फ शादी नहीं कई घरों में ऐसा भी है बेटी है पढ़के क्या करेगी।वो किसी भी चीज में आवाज नहीं उठाती।चाहे वो शादी हो या नौकरी या फिर पढ़ाई-लिखाई का मामला हो।उनको लगता है कि वे अकेली काफी नहीं हैं, उनको साथ चाहिए होता है।उनको ये समझना होगा कि वो अकेली काफी हैं। जो अपने लिए नहीं लड़ता, उसके लिए कोई और भी नहीं लड़ता।आप सक्षम हैं, आपको खुद के लिए लड़ना होगा।





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