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भारत-जर्मनी व्यापार को नई राह दिखाएगा EU-FTA समझौता, रोज़गार बढ़ने की उम्मीद: राजदूत डॉ. जैस्पर वीक

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भारत-जर्मनी के आर्थिक रिश्तों के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है। जर्मनी के राजदूत डॉ. जैस्पर वीक के अनुसार, यह समझौता…

भारत-जर्मनी व्यापार को नई राह दिखाएगा EU-FTA समझौता, रोज़गार बढ़ने की उम्मीद: राजदूत डॉ. जैस्पर वीक
(फोटो: IANS)

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भारत-जर्मनी के आर्थिक रिश्तों के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है। जर्मनी के राजदूत डॉ. जैस्पर वीक के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों के लिए फायदेमंद होगा, जिससे न केवल टैरिफ यानी सीमा शुल्क घटेंगे, बल्कि रोज़गार के नए अवसर भी पैदा होंगे। समाचार एजेंसी IANS से एक विशेष बातचीत में उन्होंने इस समझौते के दूरगामी प्रभावों पर प्रकाश डाला।

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डॉ. वीक ने उम्मीद जताई कि इस FTA पर इस साल के अंत तक हस्ताक्षर हो सकते हैं और यह अगले साल की पहली छमाही तक लागू हो सकता है। उनके मुताबिक, "यह भारत और जर्मनी के व्यापार और निवेश संबंधों के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होगा। इससे कई औद्योगिक उत्पादों और कुछ कृषि उत्पादों पर लगने वाले शुल्क (टैरिफ) कम हो जाएंगे।"

व्यापार और रोज़गार पर क्या होगा असर?

जर्मन राजदूत का मानना है कि इस समझौते से दोनों देशों की आपूर्ति शृंखलाएं (सप्लाई चेन) और बेहतर तरीके से जुड़ेंगी। उन्होंने कहा, "इससे दोनों देश एक-दूसरे की क्षमताओं का लाभ उठाकर अपने उत्पादों का निर्माण अधिक प्रतिस्पर्धी तरीके से कर सकेंगे। इतना ही नहीं, दूसरे देशों को होने वाले निर्यात में भी इसका फायदा मिलेगा।" डॉ. वीक ने ज़ोर दिया कि मजबूत अर्थव्यवस्था से सरकार का राजस्व बढ़ेगा, जिससे सीधे तौर पर भारत के लोगों को लाभ होगा।

ऊर्जा क्षेत्र में जर्मनी का सहयोग

व्यापार के अलावा ऊर्जा क्षेत्र भी दोनों देशों की साझेदारी का एक अहम स्तंभ है। 'भारत-जर्मनी ऊर्जा फोरम' के 20 साल पूरे होने का जिक्र करते हुए डॉ. वीक ने बताया कि यह मंच भारत को जीवाश्म ईंधन से नवीकरणीय ऊर्जा की तरफ ले जाने में मदद के लिए बनाया गया था। जर्मनी ने तकनीक, विशेषज्ञता और वित्तीय सहायता के माध्यम से भारत में सौर ऊर्जा संयंत्रों और ग्रिड इंटीग्रेशन जैसे क्षेत्रों में सहयोग किया है।

भारत की प्रगति की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, "वर्ष 2006 में भारत की नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता लगभग 2 से 3 गीगावाट थी, जो आज बढ़कर करीब 300 गीगावाट तक पहुंच गई है। यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है और भारत को इस पर गर्व होना चाहिए।"

रणनीतिक साझेदारी के 26 साल

डॉ. जैस्पर वीक ने भारत और जर्मनी के संबंधों को बेहद गहरा और व्यापक बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने हाल ही में राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे किए हैं, जबकि रणनीतिक साझेदारी को भी 26 साल हो चुके हैं। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि अब हम इस रणनीतिक साझेदारी से जुड़ी उम्मीदों पर खरे उतर रहे हैं और उससे भी आगे बढ़ रहे हैं।" उनके अनुसार, व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा और ऊर्जा जैसे लगभग हर महत्वपूर्ण क्षेत्र में दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं।

इनपुट: IANS

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