EPF SCAM: ईओडब्लू करेगी जांच, कई अधिकारियों पर गिर सकती है गाज

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EPF SCAM: ईओडब्लू करेगी जांच, कई अधिकारियों पर गिर सकती है गाज

उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारियों की भविष्य निधि घोटाले की जांच पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा यानी ईओडब्लू ने अपने हाथ में ले लिया है. इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि यानी ईपीएफ घोटाले में एक प्राथमिकी दर्ज करवाई थी.

जिसके बाद दो वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है, साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि इस मामले में और भी ऐसे अधिकारी है, जिनकी गिरफ्तारी की जा सकती है. जानकारी के मुताबिक पता चला है कि इस घोटाले की नींव साल 2011 में ही पड़ गई थी. उस वक्त यूपीपीसीएल ने प्रपोजल के तहत राय मांगी थी कि अगर कर्मचारियों के फंड का पैसा प्राइवेट कंपनियों में लगाया जाए तो ब्याज मिल सकेगा या नहीं.

अखिलेश यादव की सरकार ने 2014 में इस पर अपनी सहमति दी. हालांकि इस सहमति में अधिकारिक रूप से सरकार का कोई भी रोल नहीं होता है फिर भी ट्रस्ट के जरिए निवेश की जाने वाली इस राशि के लिए यूपीपीसीएल ने तत्कालीन चेयरमैन के निर्देशानुसार देवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड में निवेश के लिए मंजूरी दी गई थी.

पीएनबी हाउसिंग के अलावा उस वक्त डीएचएफएल में पहली बार 40 करोड़ रूपये का निवेश किया गया , जबकि कानूनों के मुताबिक इस पैसे का निवेश सिर्फ सरकारी वित्तीय संस्थाओं में ही किया जा सकता था. अब जांच कर रही ईओडब्ल्यू इस मामले में तमाम दूसरे अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिनकी मिलीभगत से कर्मचारियों के ईपीएफ का इतना बड़ा अमाउंट संदिग्ध कंपनी में निवेश किया गया. सूत्रों के मुताबिक इस मामले में अभी कई और अधिकारियों की गिरफ्तारी तय है.

फिलहाल सीबीआई और ईओडब्ल्यू के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उस शख्स की पहचान करना जो सरकार से कर्मचारियों के ईपीएफ के पैसे का निवेश पाने के लिए डीएचएफएल कंपनी में पैरवी कर रहा था. जिसके बाद ही यह सामने आ पाएगा की यह साजिश के तार किन-किन लोगो से जुड़े हुए है.

अभी इस मामले को लेकर नया खुलासा हुआ है कि डीएचएफएल को निवेश देने के मामले में किए गए घोटाले की एवज में कुछ लोग अधिकारियों से रिश्वत की भी मांग कर रहे थे. गिरफ्तार हुए सचिव पीके गुप्ता को धमकी भरी चिट्ठी भेजकर 6 करोड़ रुपए की मांग की गई थी.

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जिसमें सचिव पीके गुप्ता ने डीएचएफएल घोटाले के जरिए करोड़ों की कमाई की थी और उसी के एवज में उनसे 6 करोड़ रूपये की रंगदारी भी मांगी गई थी. उस चिट्ठी में ये भी लिखा था कि 6 करोड़ रुपये न दिए तो ब्लैकमेलर उनके घोटाले की पोल खोल देगा.