नोटबंदी को हुए 3 साल जाने क्या है सच… सफल और विफल ?

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8 नवंबर 2016 भारत इतिहास का वो दिन है जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रात की 8 बजे यह घोषणा की 500 और 1000 के नोटों को चलन में बंद कर दिया गया है। नोटबंदी के पीछे सबसे बड़ा उद्देश्य देश से भ्रष्टाचार को खत्म करना, कालेधन का खात्म करना, टेरर फंडिंग को रोकना , नक्सल गतिविधियों पर लगाम कसने समेत कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देना।

लेकिन मोदी सरकार की यह निति पूरी तरह से कारगार साबित नहीं हुई। भारत की अर्थव्यवस्था में नोटबंदी का प्रभाव सकारात्मक और नकारात्मक दोनों रहा। लेकिन यह कहना लाज़मी है की नोटबंदी से देश की अर्थव्यवस्था के साथ साथ देश के लोगो को भी कई हद तक प्रभवित किया है। सरकार ने नोटबंदी पर यह तर्क दिया है की टैक्स कलेक्शन बढ़ा और कालेधन में इस्तेमाल होने वाला पैसा सिस्टम में आ गया है। चलिए जानते है नोटबंदी के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव के बारे में।

डिजिटलीकरण
नोटबंदी के सकारात्मक प्रभाव की बात करे तो डिजिटलीकरण सबसे पहले जेहन में आता है। नोटबंदी के बाद डिजिटल पेमेंट में बढ़ोतरी देखने को मिली है। पेटम , इंटरनेट बैंकिंग, जैसी पेमेंट मोड का लोग अपने रोज़मर्रा में इस्तेमाल करने लगे। जैसी सेफ पेमेंट और कैशलेस पेमेंट्स लेनदेन की रफ्तार 40 से 70 फीसदी बढ़ी। डिजिटलीकरण किसी भी देश की प्रगति को दर्शता है।

जीडीपी पर असर
नोटबंदी से देश की आर्थिक विकास दर की गति पर असर पड़ा है, 2015-1016 के दौरान जीडीपी की ग्रोथ रेट 8.01 फ़ीसदी के आसपास थी, जो 2016-2017 के दौरान 7.11 फ़ीसदी रह गई और इसके बाद जीडीपी की ग्रोथ रेट 6.1 फ़ीसदी पर आ गई और 2019 तक जीडीपी 5 फ़ीसदी तक पहुंच गयी जो देश की अर्थव्यवस्था के लिहाज़ से बिलकुल भी सही नहीं है।

टैक्स भरनेवालों में इजाफा
वित्त वर्ष 2017-18 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त की समाप्ति पर प्राप्त कुल रिटर्न की संख्या 71% बढ़कर 5.42 करोड़ रही. अगस्त 2018 तक दाखिल आयकर रिटर्न की संख्या 5.42 करोड़ है जो 31 अगस्त 2017 में 3.17 करोड़ थी. यह दाखिल रिटर्न की संख्या में 70.86% वृद्धि को दर्शाता है और २०१९ में भी टैक्स पयेर की संख्या में इजाफा हुआ है।

छोटे उद्योगों की हालत हुई खस्ता
नोटबंदी से अगर कोई अधिकतर प्राभवित हुआ है तो वो है लघु उद्योग, जो ज्‍यादातर कैश में लेनदेन करते थे. नोटबंदी के दौरान इन उद्योगों के लिए कैश की किल्‍लत हो गई. इसकी वजह से उनका कारोबार की हालत खस्ता होगई। जिससे वो अभी तक नहीं उभर पाए है।

नक्सल और आतंकवाद पर रोकथाम
इससे आतंकवाद और नक्सली गतिविधियों पर लगाम लगाई जाएगी। नक्सल और आतंकवाद देश से खत्म नहीं हुआ लेकिन इनकी गतिविधियों में कुछ कमी आयी है।

होम लोन हुआ सस्ता
होम लोन की ब्याज दरों में 3% तक की गिरावट आई. कैपिटल सिंडिकेट के मैनेजिंग पार्टनर सुब्रमण्यम पशुपति ने न्यूज18इंडिया को बताया कि नोटबंदी से होम लोन सस्‍ता करने में बड़ी मदद मिली है. नोटबंदी की वजह से बैंकों में काफी बड़ी मात्रा में डिपॉजिट आया है. इसका फायदा बैंकों ने आम आदमी को सस्‍ते कर्ज के तौर पर दिया. ये इसी से साबित होता है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल हाउसिंग दरों में 3 फीसदी तक कमी आई है. पिछले साल ये दरें जहां 10.5 फीसदी से लेकर 12 फीसदी तक थीं, अब ये 8 से 9 फीसदी पर आ गई हैं।

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नोटबंदी एक ऐसा फैसला था जिसने कई मायनो में देश के कई पहलू पर ऐसा असर डाला है। अभी भी यह कयास लगये जा रहे है की नोटबंदी देर से ही सही लेकिन एक लाभकारी असर देश के लिए जरूर लेकर आएगी।