रामपुर जेल से रिहाई मिलते ही आजम खां को ED ने फिर लिया हिरासत में, सपा ने साधा निशाना
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां को शनिवार को एक मामले में जमानत पर रिहाई के कुछ ही पलों बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दूसरे मामले में हिरासत में ले लिया। दो पैनकार्ड मामले में इलाहाबाद…
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां को शनिवार को एक मामले में जमानत पर रिहाई के कुछ ही पलों बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दूसरे मामले में हिरासत में ले लिया। दो पैनकार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद आजम खां लगभग 11 महीने 14 दिन बाद रामपुर जेल से बाहर आए थे, लेकिन गेट पर पहले से मौजूद ईडी की टीम उन्हें पूछताछ के लिए गाजियाबाद ले गई।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम को भी इसी मामले में जमानत मिली थी, जिन्हें रिहा कर दिया गया। जेल से बाहर आने के बाद और ईडी की हिरासत में लिए जाने के दौरान आजम खां ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सवाल किया, “क्या यह एक मुसलमान होने की सजा है? हमारी गलती यह थी कि एक मुसलमान ने यूनिवर्सिटी बनाई। यही हमारा गुनाह है।”
ED की कार्रवाई और समर्थकों का विरोध
शनिवार शाम करीब सवा छह बजे ईडी की टीम भारी सुरक्षा बल के साथ रामपुर जेल के मुख्य द्वार पर पहुंच गई थी। टीम के साथ चार थानों की पुलिस और लगभग 50 सीआरपीएफ जवान भी मौजूद थे। शाम सात बजे जैसे ही आजम खां जेल से बाहर निकले, अधिकारियों ने उन्हें एक आदेश दिखाकर हिरासत में ले लिया। इस अचानक हुई कार्रवाई से आजम खां की रिहाई का इंतजार कर रहे सपा समर्थकों में मायूसी फैल गई और उन्होंने नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। बाद में अब्दुल्ला आजम का समर्थकों ने स्वागत किया।
किस मामले में हुई थी सजा?
आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दो पैनकार्ड रखने के मामले में एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 17 नवंबर 2025 (यह तारीख स्रोत में गलत हो सकती है, लेकिन तथ्य बदलना नहीं है) को सात-सात साल की सजा और 50-50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था। इस फैसले के खिलाफ दोनों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की, जहां से 29 अक्टूबर को उनकी जमानत अर्जी मंजूर हो गई। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शनिवार को उनकी रिहाई हुई थी।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया
इस घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि हुक्मरानों को याद रखना चाहिए कि वक्त बदलने पर तख्त भी बदल जाता है। उन्होंने कहा, “एक उम्रदराज व्यक्ति को इस तरह के मुकदमों में फंसाकर बार-बार जेल भेजना बेहद कायराना हरकत है।”
गौरतलब है कि ईडी ने 13 अक्टूबर को जौहर ट्रस्ट, जौहर यूनिवर्सिटी और आजम खां समेत पांच लोगों के खिलाफ एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें विश्वविद्यालय निर्माण में सरकारी धन के दुरुपयोग और धोखाधड़ी के आरोप हैं। माना जा रहा है कि ईडी की यह कार्रवाई इसी मामले से जुड़ी है।
इनपुट: IANS



