फास्ट-ट्रैक विशेष न्यायालयों को मिली 2031 तक की मोहलत, दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों में तेजी से न्याय दिलाने पर जोर
यौन अपराधों से जुड़े मामलों में पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दुष्कर्म और…
यौन अपराधों से जुड़े मामलों में पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के मामलों की सुनवाई के लिए चल रही फास्ट-ट्रैक विशेष न्यायालय (FTSC) योजना को 31 मार्च 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस विस्तार के लिए कुल 3,788.04 करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय निर्धारित किया गया है।
इस कुल राशि में केंद्र सरकार का हिस्सा 2,353.15 करोड़ रुपये होगा, जिसे निर्भया फंड से वित्त पोषित किया जाएगा, जबकि शेष 1,434.89 करोड़ रुपये राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा वहन किए जाएँगे। यह योजना मूल रूप से 2 अक्टूबर 2019 को एक साल के लिए शुरू की गई थी और इसे पहले 31 मार्च 2026 तक बढ़ाया गया था।
न्यायालयों की संख्या और क्षमता में वृद्धि
इस केंद्र-प्रायोजित योजना के तहत, विशेष पॉक्सो अदालतों सहित कुल 850 फास्ट-ट्रैक विशेष न्यायालयों के संचालन का लक्ष्य है। वर्तमान में देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 779 FTSC कार्यरत हैं, जिनमें 399 विशेष पॉक्सो अदालतें शामिल हैं। लंबित मामलों के आंकड़ों के आधार पर अब इनकी संख्या बढ़ाकर 850 की जाएगी ताकि अधिक जिलों को इसके दायरे में लाया जा सके।
प्रत्येक FTSC में एक समर्पित न्यायिक अधिकारी, एक विशेष लोक अभियोजक और छह सहायक कर्मचारियों का प्रावधान है, ताकि सुनवाई की प्रक्रिया तेज और सुचारू रूप से चल सके। यह ढाँचा पॉक्सो अधिनियम, 2012 के तहत लंबित मामलों के शीघ्र निपटान को सुनिश्चित करने में मदद करेगा।
योजना का उद्देश्य और प्रभाव
इस पहल का मुख्य लक्ष्य यौन अपराधों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हुए अपराधों के पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाना और लंबित मामलों के बोझ को कम करना है। IANS के अनुसार, योजना की शुरुआत से अब तक इन विशेष न्यायालयों द्वारा 4,02,457 मामले निपटाए जा चुके हैं।
इसके अलावा, योजना के तहत कमजोर गवाहों के लिए बयान केंद्र और बच्चों के अनुकूल अदालत कक्ष स्थापित करने को भी प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि पीड़ित बिना किसी अतिरिक्त मानसिक दबाव के अपनी गवाही दे सकें। न्याय विभाग, राज्य सरकारों और उच्च न्यायालयों के साथ समन्वय करके इस योजना के कार्यान्वयन और प्रदर्शन की निगरानी करेगा। यह योजना सुप्रीम कोर्ट के 25 जुलाई 2019 के उस निर्देश के अनुपालन में भी है, जिसमें 100 से अधिक पॉक्सो मामले लंबित होने वाले जिलों में विशेष अदालतें स्थापित करने को कहा गया था।
इनपुट: IANS



