विशेष : “क्या ‘काशी कॉरिडोर’ के नाम पर प्रधानमंत्री ‘शिव नगरी’ बर्बाद कर रहें हैं?”

0

बनारस अब बदल रहा है, वो शहर जिसको दुनिया का प्राचीन शहर माना जाता है, उसका उद्धार किया जा रहा है. लेकिन सवाल यह है कि क्या आधुनिकीकरण के नाम पर देश के विरासतों को जो कि करोडो सालों से मौजूद है,बर्बाद किया जा रहा है? ऐसा माना जाता है कि काशी में 33 करोड़ देवी-देवता स्वयंभू रूप में विराजमान हैं. हजार सालों से भी अधिक सालों से वहां पर लोगों के घरों में ‘मंदिर’ हैं. इन घरों में यह धरोहर इतने ही पुराने समय से मौजूद है कि लोगों की भावनाएं ‘शिवशम्भू’ से जुडी हुई है.

काशी कॉरिडोर प्रोजेक्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट ‘काशी कॉरिडोर प्रोजेक्ट’ है, कल प्रधानमंत्री ने इस प्रोजेक्ट की आधारशिला रक्खी. अगर आपको मालूम न हो तो बताते चले इस प्रोजेक्ट के लिए हज़ारों लोगो को मुआवजा देकर उनके घरों से बेदखल कर दिया गया है. अब वो नगरी जो की अपने छोटे-छोटे मंदिरों के लिए प्रसिद्द है, विदेशो से सैलानी इन्ही सब विशेषताओं के दर्शन के लिए आतें है, बदल रही है. सवाल यह है कि क्या देश में ‘विकाश’ की कीमत धरोहर है? यहां पर यह तर्क भी दिया जाता है कि काशी का जीर्णोद्धार ‘सोमनाथ’ की तर्ज़ पर किया जा रहा है. लेकिन सोमनाथ और बनारस में एक बहुत बड़ा अंतर भी है. सोमनाथ के जीर्णोद्धार के लिए कई छोटे-छोटे मंदिरों की कुर्बानी नहीं देनी पड़ी थी, बनारस में ऐसे हज़ारों मंदिर तबाह किये गए हैं.

अब इस कॉरिडोर से मंदिर तक जाने पर 300 रूपये का टिकट भी निर्धारित किये जाने की उम्मीद है, जो अमीर श्रद्धालु हैं उनपर शिव की कृपा बगैर लाइन लगाए बरसेगी और गरीब वैसे ही लाइनों में लगे नज़र आएंगे जैसे कि नोटबंदी के बाद नज़र आये थे. बाकी देश अब भी चल ही रहा है.