गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
इकोनॉमी

म्यूचुअल फंड में निवेश होगा ज्यादा फायदेमंद, 1 नवंबर से सेबी लागू कर रही है यह नया नियम

म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए एक बड़ी खबर है। 1 नवंबर से, जब आप किसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) के डिजिटल प्लेटफॉर्म से कोई म्यूचुअल फंड स्कीम खरीदेंगे, तो आपको डिफ़ॉल्ट रूप से 'डायरेक्ट प्लान' ही…

म्यूचुअल फंड में निवेश होगा ज्यादा फायदेमंद, 1 नवंबर से सेबी लागू कर रही है यह नया नियम
(फोटो: IANS)

म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए एक बड़ी खबर है। 1 नवंबर से, जब आप किसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) के डिजिटल प्लेटफॉर्म से कोई म्यूचुअल फंड स्कीम खरीदेंगे, तो आपको डिफ़ॉल्ट रूप से 'डायरेक्ट प्लान' ही मिलेगा। इस बदलाव का सीधा असर आपके रिटर्न पर पड़ेगा, क्योंकि डायरेक्ट प्लान का खर्च (एक्सपेंस रेश्यो) आमतौर पर रेगुलर प्लान से कम होता है, जिससे निवेशकों को ज्यादा मुनाफा मिलता है।

विज्ञापन

यह जानकारी भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान दी। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कोई निवेशक इसके बावजूद 'रेगुलर प्लान' चुनना चाहता है, तो AMC को उन्हें यह साफ-साफ बताना होगा कि वे इसके लिए ज्यादा एक्सपेंस रेश्यो चुका रहे हैं। सेबी का यह कदम निवेशकों का रिटर्न बढ़ाने की एक कोशिश है।

IPO और जुटाई गई रकम पर सेबी की नज़र

तुहिन कांत पांडे ने बताया कि सेबी केवल म्यूचुअल फंड तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह कंपनियों द्वारा बाजार से पैसा जुटाने के नियमों की भी समीक्षा कर रहा है। नियामक मेनबोर्ड इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) और फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) के ढांचे का पुनर्मूल्यांकन करेगा। इसके अलावा, नई पीढ़ी की कंपनियों को सार्वजनिक पूंजी तक बेहतर पहुंच दिलाने के लिए SME IPO और 'इनोवेटर्स ग्रोथ प्लेटफॉर्म' के नियमों की भी समीक्षा की जा रही है।

पांडे ने जोर देकर कहा, "सार्वजनिक पूंजी अपने साथ सार्वजनिक जिम्मेदारी भी लाती है।" उन्होंने बताया कि सेबी इस बात की सख्त निगरानी का प्रस्ताव रख रहा है कि कंपनियां IPO से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कैसे करती हैं। इसी सिलसिले में सेबी एक ऐसा ढांचा तैयार कर रहा है, जिसके तहत थर्ड-पार्टी निगरानी एजेंसियां यह जांच करेंगी कि जुटाई गई रकम का उपयोग उन्हीं कामों के लिए हो रहा है या नहीं, जिनका वादा ऑफर दस्तावेजों में किया गया था। डिबेंचर ट्रस्टियों के लिए बने ढांचे की भी समीक्षा की जा रही है।

नियम न मानने पर होगी सख्ती

इस महीने की शुरुआत में सेबी ने एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया था, जिसमें IPO फंड की निगरानी को मजबूत करने के प्रस्ताव दिए गए थे। इसमें सुझाव दिया गया है कि इश्यू का आकार चाहे जो भी हो, 'ऑफर-फॉर-सेल' (OFS) को छोड़कर सभी पब्लिक इश्यू के लिए एक निगरानी एजेंसी रखना अनिवार्य कर दिया जाए।

अगर कोई कंपनी जांच में एजेंसी का सहयोग नहीं करती है, तो स्टॉक एक्सचेंज उस पर हर मामले के लिए 50,000 रुपए का जुर्माना लगा सकेंगे। लगातार नियम उल्लंघन करने पर प्रमोटरों के डीमैट अकाउंट भी फ्रीज किए जा सकते हैं। ये प्रस्ताव फिलहाल सलाह-मशविरे के दौर में हैं और अभी इन्हें नियम के तौर पर लागू नहीं किया गया है। वर्तमान में, 100 करोड़ रुपए से बड़े फ्रेश इश्यू वाले IPO से जुटाई गई रकम की ही निगरानी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी द्वारा की जाती है।

इनपुट: IANS

N

News4Social बिज़नेस डेस्क

News4Social बिज़नेस डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से कारोबार और अर्थव्यवस्था से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →