गुरूवार, 15 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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दिल्ली राशन घोटाला: AAP ने मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की भूमिका पर उठाए सवाल, CBI जांच की मांग तेज

दिल्ली के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में कथित तौर पर सैकड़ों करोड़ रुपये के राशन घोटाले का मामला गरमा गया है। इस मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच का दायरा…

दिल्ली राशन घोटाला: AAP ने मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की भूमिका पर उठाए सवाल, CBI जांच की मांग तेज
(फोटो: IANS)

दिल्ली के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में कथित तौर पर सैकड़ों करोड़ रुपये के राशन घोटाले का मामला गरमा गया है। इस मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच का दायरा बढ़ाने की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, AAP का आरोप है कि इस घोटाले के असली 'मास्टरमाइंड' कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा हैं और उन्हें भी जांच में शामिल किया जाना चाहिए।

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AAP की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इस संबंध में सीबीआई को एक पत्र भी लिखा है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी ने अब तक केवल मंत्रालय के मध्य-स्तरीय अधिकारियों को ही गिरफ्तार किया है, जबकि असली साजिशकर्ताओं को बचाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर एक अधीनस्थ अधिकारी को सिर्फ आदेश लागू करने के लिए निलंबित किया जा सकता है, तो वे मंत्री कैसे बच सकते हैं जिन्होंने इन अवैध आदेशों को दिया था।

क्या है पूरा घोटाला?

यह मामला बाहरी राज्य के एक सार्वजनिक उपक्रम (PSU) से बिना ई-टेंडर जारी किए, प्रशासनिक आदेशों के जरिए 31,000 मीट्रिक टन चावल खरीदने से जुड़ा है। आरोप है कि यह चावल 23.20 रुपये प्रति किलोग्राम की भारी सब्सिडी वाली दर पर खरीदा गया, जबकि बाजार में इसकी कीमत लगभग 46 रुपये प्रति किलो थी।

आरोप है कि दिल्ली के जरूरतमंदों को यह राशन देने के बजाय इसे निजी चैनलों के माध्यम से हरियाणा की व्यावसायिक इकाइयों को बेच दिया गया। इसमें मैसर्स उत्पलाक्षी एग्रो प्रोडक्ट्स, मैसर्स दिबेश कॉमर्शियल्स और मैसर्स सुपर ग्रेन्स जैसे चैनल पार्टनर्स के नाम सामने आए हैं। इस पूरी प्रक्रिया से सरकारी खजाने को हर हफ्ते 13.67 करोड़ रुपये का भारी नुकसान होने का अनुमान है, और यह घोटाला 22 हफ्तों तक चला।

मंत्री की भूमिका पर गंभीर आरोप

सौरभ भारद्वाज ने अपने पत्र में दावा किया है कि इस घोटाले को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब 7 जनवरी, 2026 को खरीद का अनुरोध आया, तो मंत्री ने इसे महीनों तक लंबित रखा। इसके बाद, 8 अप्रैल, 2026 को उन्होंने अधिकारियों को इस अवैध प्रस्ताव पर "सकारात्मक विचार" करने का सीधा निर्देश दिया। इसी निर्देश के बाद, 4 मई, 2026 को बिना पहली खेप का हिसाब-किताब या उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) जमा हुए ही, उतनी ही मात्रा में राशन की दूसरी खेप भी आवंटित कर दी गई।

CBI से की गई तीन प्रमुख मांगें

आम आदमी पार्टी ने CBI से तीन प्रमुख मांगें की हैं:

1. FIR (RC 2182026A0014) में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा का नाम औपचारिक रूप से शामिल कर उनकी भूमिका की जांच की जाए।

2. मंत्रालय के सभी आधिकारिक रिकॉर्ड, रूटिंग लॉग, ईमेल और डिजिटल सबूत तत्काल जब्त किए जाएं ताकि उनसे छेड़छाड़ न हो सके।

3. निलंबित अधिकारी के कबूलनामे के आधार पर सभी शामिल लोगों के बयान दर्ज हों और काले धन के लेन-देन का पता लगाया जाए।

उल्लेखनीय है कि CBI इस मामले में पहले ही प्रारंभिक जांच शुरू कर चुकी है और उसने बड़े पैमाने पर फंड के हेरफेर की पुष्टि भी की है।

इनपुट: IANS

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News4Social दिल्ली डेस्क

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