डिजिटल कृषि मिशन: समय से 5 महीने पहले बना 11 करोड़ किसानों का फार्मर आईडी कार्ड
भारत के डिजिटल कृषि मिशन ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार ने मार्च 2027 तक 11 करोड़ किसानों के लिए विशिष्ट ‘फार्मर आईडी’ बनाने का लक्ष्य रखा था, जिसे तय समय से पाँच महीने पहले ही पूरा कर…
भारत के डिजिटल कृषि मिशन ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार ने मार्च 2027 तक 11 करोड़ किसानों के लिए विशिष्ट ‘फार्मर आईडी’ बनाने का लक्ष्य रखा था, जिसे तय समय से पाँच महीने पहले ही पूरा कर लिया गया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस लक्ष्य की प्राप्ति को भारतीय कृषि के लिए एक “ऐतिहासिक दिन” बताया है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प ‘विकसित भारत के लिए, विकसित कृषि और समृद्ध किसान’ है, और इस लक्ष्य को पाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बेहद ज़रूरी है। इसी सोच के साथ डिजिटल कृषि मिशन की शुरुआत की गई थी, जिसके तहत हर किसान को एक अलग पहचान देने के लिए फार्मर आईडी बनाने का काम शुरू हुआ।
फार्मर आईडी से किसानों को क्या लाभ होगा?
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, इस आईडी के बनने से किसानों को कई सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी और आसान तरीके से मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि अब बैंक से ऋण लेने, फसल बीमा योजना का लाभ पाने, आपदा राहत की राशि प्राप्त करने या अपनी उपज बेचने जैसे कामों के लिए बार-बार कागज़ जमा करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “अब यह फार्मर आईडी के माध्यम से योजनाओं का पारदर्शी तरीके से लाभ मिलेगा। बैंक का ऋण हो, कोई कागज़ के पेट नहीं भरने पड़ेंगे...।”
चौहान ने इस बात पर जोर दिया कि इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित होगा कि योजनाओं का लाभ केवल सही और पात्र किसान तक ही पहुँचे। उन्होंने कहा कि तकनीक का यह उपयोग खेती को आसान बनाने के साथ-साथ बेहतर भी बनाएगा।
सभी सहयोगियों को दी बधाई
इस बड़ी उपलब्धि के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री ने केंद्र सरकार के अधिकारियों, राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और ज़िला प्रशासनों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ये सभी बधाई के पात्र हैं। चौहान ने देश के किसान भाई-बहनों को भी बधाई देते हुए कहा, “अब आपके पास आपकी पहचान, किसान की पहचान फार्मर आईडी है। सही समय पर, बिना किसी परेशानी के योजनाओं का लाभ उठाइये, और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके खेती बदलिये।”
इनपुट: IANS



