मंगलवार, 22 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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दिल्ली: 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर बुजुर्ग से 67 लाख की ठगी, पुलिस ने ऐसे की पहचान और मदद

दिल्ली पुलिस की साइबर अपराध शाखा (IFSO) ने एक बड़ी ऑनलाइन ठगी का खुलासा करते हुए 'डिजिटल अरेस्ट' के जाल में फँसे एक वरिष्ठ नागरिक की समय पर मदद की है। ठगों ने बुजुर्ग को डराकर उनसे करीब 67.30 लाख…

दिल्ली: 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर बुजुर्ग से 67 लाख की ठगी, पुलिस ने ऐसे की पहचान और मदद
(फोटो: IANS)

दिल्ली पुलिस की साइबर अपराध शाखा (IFSO) ने एक बड़ी ऑनलाइन ठगी का खुलासा करते हुए 'डिजिटल अरेस्ट' के जाल में फँसे एक वरिष्ठ नागरिक की समय पर मदद की है। ठगों ने बुजुर्ग को डराकर उनसे करीब 67.30 लाख रुपये अपने खातों में जमा करा लिए थे। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पुलिस की एक अलग मामले की जाँच के दौरान इस धोखाधड़ी का पता चला, जिसके बाद पीड़ित तक पहुँचकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।

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पुलिस को यह सफलता एक अन्य साइबर अपराध की शिकायत की जाँच करते हुए मिली। 20 सितंबर को हुई इस धोखाधड़ी में एक बड़े लेन-देन का मनी ट्रेल पुलिस के सामने आया। IFSO की टीम ने जब बैंक खातों का विश्लेषण किया, तो उन्हें कर्नाटक के नागौरी स्थित एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का एक्सिस बैंक खाता मिला, जिसका इस्तेमाल पैसों को घुमाने (म्यूल अकाउंट) के लिए किया जा रहा था।

जाँच की कड़ी से पीड़ित तक पहुँची पुलिस

इंस्पेक्टर परवीन कुमार, हेड कॉन्स्टेबल मनोज और महिला कॉन्स्टेबल मीनाक्षी की टीम ने जब इस म्यूल अकाउंट में पैसे आने के स्रोत की जाँच की, तो वह साउथ इंडियन बैंक के एक बचत खाते से जुड़ा पाया गया। पुलिस को शक हुआ कि यह खाता या तो ठगों का है या फिर किसी ऐसे व्यक्ति का है जो खुद ठगी का शिकार हुआ है। खाते से जुड़ी जानकारी के आधार पर पुलिस पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी में रहने वाले खाताधारक तक पहुँची।

जब IFSO टीम ने खाताधारक से संपर्क किया, तो पता चला कि वे एक वरिष्ठ नागरिक हैं, अकेले रहते हैं और इस घटना से बेहद घबराए हुए थे। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए टीम ने तुरंत जनकपुरी के SHO से संपर्क साधा और बीट कॉन्स्टेबल आर.के. मीणा को उनके घर भेजा। पुलिस ने पीड़ित के परिवार को भी सूचित किया, जो तत्काल वहाँ पहुँचे और उन्हें भावनात्मक सहारा दिया। इसके बाद पुलिस ने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर उनकी शिकायत दर्ज कराने में मदद की, ताकि ठगी गई रकम को ट्रैक करके फ्रीज कराया जा सके।

क्या है 'डिजिटल अरेस्ट' और इससे कैसे बचें?

दिल्ली पुलिस ने नागरिकों को इस तरह की धोखाधड़ी से सावधान रहने की सलाह दी है। पुलिस के अनुसार, अपराधी खुद को सीबीआई, ईडी या पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं और किसी अपराध में शामिल होने का झूठा आरोप लगाकर पीड़ित को घर में ही 'डिजिटल रूप से गिरफ्तार' करने का नाटक करते हैं। वे जाँच या सेटलमेंट के नाम पर पैसे की माँग करते हैं।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कोई प्रावधान नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर पूछताछ या गिरफ्तारी के नाम पर पैसे जमा करने के लिए नहीं कहती। पुलिस ने लोगों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों से अपील की है कि ऐसी कॉल आने पर घबराएँ नहीं, तुरंत कॉल काट दें और अपने परिवार को सूचित करें। किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल 1930 पर शिकायत करें।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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