DGCA के पूर्व अधिकारी पर CBI का शिकंजा, रिश्तेदारों की कंपनियों को फायदा पहुँचाने का गंभीर आरोप
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी पर अपने पद का दुरुपयोग कर चुनिंदा फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूलों को अनुचित लाभ पहुँचाने का आरोप लगा है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले…
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी पर अपने पद का दुरुपयोग कर चुनिंदा फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूलों को अनुचित लाभ पहुँचाने का आरोप लगा है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में डीजीसीए के पूर्व फ्लाइंग ट्रेनिंग डायरेक्टर कैप्टन अनिल गिल और चार कंपनियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, आरोप है कि गिल ने अपने रिश्तेदारों द्वारा संचालित कंपनियों के नेटवर्क के माध्यम से एक बड़ा आर्थिक गोरखधंधा चलाया।
सीबीआई द्वारा दर्ज की गई FIR के मुताबिक, कैप्टन अनिल गिल पर आरोप है कि उन्होंने कुछ खास फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन (FTO) को फायदा पहुँचाया, जिससे दूसरे ऑपरेटरों को कारोबारी नुकसान हुआ। जांच एजेंसी ने गिल के अलावा ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड, रेडबर्ड एविएशन प्राइवेट लिमिटेड, साब्रेस कॉरपोरेट सॉल्यूशंस लिमिटेड और सैंडहिल्स एविएशन आईएफएससी लिमिटेड को भी नामजद किया है।
कैसे काम करता था यह नेटवर्क?
आरोप है कि कैप्टन गिल ने अपने करीबियों और रिश्तेदारों द्वारा चलाई जा रही बेनामी कंपनियों के जरिए बेहद कम दाम पर पुराने ट्रेनिंग विमान खरीदे। बाद में इन्हीं विमानों को पसंदीदा फ्लाइंग ट्रेनिंग संस्थानों को बहुत ऊँची दरों पर लीज पर दे दिया गया, जिससे भारी मुनाफा कमाया गया। जांच में सामने आया है कि इन कंपनियों का नियंत्रण गिल के रिश्तेदारों के हाथों में था। उदाहरण के तौर पर, 2016 में बनी कंपनी ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल में गिल की माँ कमलेश गिल और मौसी संतोष कुमारी निदेशक थीं। बाद में उनके अन्य रिश्तेदार विकास नैन और दीपिका गिल भी इससे जुड़े।
विमानों की खरीद-फरोख्त और लीज का खेल
सीबीआई की एफआईआर में विमानों की खरीद और लीज से जुड़ी कई गंभीर बातें सामने आई हैं। ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल (बीएजीपीएल) ने 2020 में 1975 मॉडल का एक सेसना विमान सिर्फ 10 लाख रुपए में खरीदा। इसके एक साल बाद, 1981 मॉडल का एक और विमान 37.5 लाख रुपए में खरीदा गया। आरोप है कि यह दूसरा विमान उड़ान भरने की स्थिति में था और उसकी बाज़ार कीमत 75 लाख से 1 करोड़ रुपए के बीच थी, लेकिन उसे बहुत कम दाम पर हासिल किया गया।
इन दोनों विमानों को बाद में रेडबर्ड एविएशन एकेडमी प्राइवेट लिमिटेड को लीज पर दे दिया गया। आरोप है कि कैप्टन गिल ने खुद अपनी आधिकारिक हैसियत से इस लीज को मंजूरी दी थी। अकेले रेडबर्ड एकेडमी से ही बीएजीपीएल को 2021 से अक्टूबर 2023 के बीच लीज के तौर पर 2.16 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम मिली।
मंजूरी देने में पक्षपात के आरोप
कैप्टन गिल पर नियामकीय मंजूरी देने में भी पक्षपात करने का आरोप है। रेडबर्ड एविएशन एकेडमी को शुरुआती FTO मंजूरी महज एक महीने और तीन दिन में मिल गई, जबकि अन्य कंपनियों जैसे स्काईनेक्स एयरो और जेट सर्व एविएशन को इसी प्रक्रिया में चार से छह महीने लग गए। इतना ही नहीं, सितंबर 2022 में गिल ने उस चयन समिति की अध्यक्षता की, जिसने उनके रिश्तेदार विकास नैन को डिप्टी चीफ फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर नियुक्त किया। इसके बाद नैन को रेडबर्ड एविएशन एकेडमी में करीब 6.5 लाख रुपए प्रति माह के वेतन पर नौकरी मिल गई।
इनपुट: IANS



