गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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ग्राम स्वराज योजना को मिली कैबिनेट की मंज़ूरी, पंचायतों के सशक्तिकरण पर खर्च होंगे ₹7,395 करोड़

देश में ग्रामीण विकास और पंचायती राज व्यवस्था को मज़बूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम फ़ैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'प्रधानमंत्री विकसि…

ग्राम स्वराज योजना को मिली कैबिनेट की मंज़ूरी, पंचायतों के सशक्तिकरण पर खर्च होंगे ₹7,395 करोड़
(फोटो: IANS)

देश में ग्रामीण विकास और पंचायती राज व्यवस्था को मज़बूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम फ़ैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना' (पीएमजीएसवाई) को 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंज़ूरी दे दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस योजना के लिए कुल 7,395.55 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है।

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इस फ़ैसले पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और पंचायतों के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर उन्होंने लिखा, "इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना को मंजूरी दी है। इससे स्थानीय संसाधनों, क्षमताओं और चुनौतियों के अनुरूप योजनाएं तैयार की जा सकेंगी। इस कदम से जनभागीदारी को और बल मिलेगा, जिससे सतत विकास के लक्ष्यों को तेजी से हासिल किया जा सकेगा।"

योजना का वित्तीय ढाँचा और लाभार्थी

कुल 7,395.55 करोड़ रुपए के बजट में केंद्र सरकार का हिस्सा 4,869.48 करोड़ रुपए होगा, जबकि राज्य सरकारें 2,526.07 करोड़ रुपए का योगदान देंगी। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, यह योजना सोलहवें वित्त आयोग के कार्यकाल तक चलेगी। इस योजना से देश भर की 25 लाख से अधिक पंचायतों और पारंपरिक स्थानीय निकायों के लगभग 32 लाख निर्वाचित प्रतिनिधि, पंचायत पदाधिकारी और अन्य संबंधित लोग सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे।

योजना के प्रमुख उद्देश्य और प्रभाव

शासन क्षमता में सुधार: योजना का लक्ष्य हर साल लगभग 32 लाख निर्वाचित प्रतिनिधियों और पंचायत अधिकारियों की शासन क्षमताओं को बढ़ाना है। इससे उन्हें समग्र योजना निर्माण, नागरिकों से संवाद, संसाधन प्रबंधन और स्थानीय सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी।

वित्तीय जवाबदेही और पारदर्शिता: यह योजना हर साल कम से कम 2.55 लाख ऑनलाइन लेखापरीक्षा योजनाओं (Online Audit Plans) की तैयारी और समय पर ऑडिट पूरा करने में सहायता करेगी। इससे पंचायतों की वित्तीय आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, उपलब्ध फंड के उपयोग में जवाबदेही मज़बूत होगी और संसाधनों का पारदर्शी इस्तेमाल सुनिश्चित होगा।

जन-जागरूकता: इस कार्यक्रम के तहत चलाए जाने वाले प्रत्येक जागरूकता अभियान के माध्यम से कम से कम 1 करोड़ नागरिकों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। ग्राम सभाओं और अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर सरकारी योजनाओं की समझ बेहतर की जाएगी। आधिकारिक बयान में यह भी स्पष्ट किया गया है कि योजना के तहत कोई स्थायी पद सृजित नहीं किया जाएगा, लेकिन ज़रूरत के आधार पर संविदा पर तकनीकी सहायता के लिए भर्तियाँ की जा सकती हैं। यह योजना देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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