Delhi Pollution: समय से पहले बढ़ा ओजोन का खतरा, अस्थमा वाले लोगों की बढ़ेगी परेशानी

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Delhi Pollution: समय से पहले बढ़ा ओजोन का खतरा, अस्थमा वाले लोगों की बढ़ेगी परेशानी

विशेष संवाददाता, नई दिल्लीः इस बार मार्च से ही शुरू हुई गर्मियों की वजह से राजधानी में ओजोन के स्तर ने अप्रैल के अंतिम पखवाड़े में ही तय मानक (100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर) को पार कर लिया था। इसके बढ़ने से लोगों को सांस की परेशानियां होती हैं। खासतौर से जिन लोगों को अस्थमा है उन्हें अधिक दिक्कत होती है।

सेंट्रल पलूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) के पिछले कुछ दिनों के एयर बुलेटिन पर नजर डाले तो एक्यूआई में भले कुछ गिरावट आई हो, लेकिन प्रदूषण की मुख्य वजह ओजोन भी रहा है। एक्सपर्ट के अनुसार ज्यादा तापमान में विभिन्न गैसों के रिएक्शन से ओजोन का स्तर बढ़ता है। दिल्ली प्रदूषण कंट्रोल कमिटी (डीपीसीसी) के डाटा के अनुसार कई जगहों पर ओजोन का स्तर तय मानकों को पार कर गया है। इसकी मुख्य वजह नाइट्रोजन ऑक्साइड और वीओसी (वॉलेटाइल आर्गेनिक कपाउंड) हैं। यह दोनों गाड़ियों के धुंए और उद्योगों के धुंए से निकलते हैं।

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कई जगहों पर ज्यादा रहा लेवल: अप्रैल के अंतिम हफ्ते में जब तापमान रेकार्ड तोड़ रहा था, तब कई जगहों पर ओजोन का स्तर सात में से छह दिन तय मानकों से अधिक रहा। इनमें जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम, डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज, नेहरू नगर, मंदिर मार्ग, आर. के. पुरम और नरेला शामिल हैं। मुंडका में ओजोन का स्तर सात में से पांच दिन अधिक रहा। वहीं अरबिंदो मार्ग में भी यह तीन दिन अधिक रहा। इस दौरान जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में तो यह 199.8 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया। जबकि कर्णी सिंह में यह 188.4 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा।

और अधिक जा सकता है लेवल: सीपीसीबी एयर लैब के सेवानिवृत इंचार्ज डी. साहा ने बताया कि ओजोन का स्तर उस समय अधिक रहता है जब तापमान अधिक हो और आसमान पूरी तरह साफ हो। यदि पीएम 10 या 2.5 का स्तर कम होता है तो सूर्य की गर्मी वातावरण में काफी नीचे तक आती है और नाइट्रोजन ऑक्साइड के साथ मिलकर ओजोन बनाती है। अभी से ओजोन के स्तर बढ़ने का मतलब है कि इस महीने और जून में इसके लेवल काफी अधिक जा सकता है।

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आगे क्या रहेगा ओजोन का स्तर: पिछले दो से तीन दिनों में ओजोन के स्तर में मामूली कमी आई है। मंगलवार को इसका स्तर कुछ जगहों पर मामूली रूप से कम हुआ है। इसकी वजह यह है कि मंगलवार को कुछ जगहों पर बादल छाए रहे। ‘असानी’ तूफान की वजह से राजधानी के बढ़ते तापमान पर ब्रेक लग गया, लेकिन अब बुधवार से एक बार फिर तापमान बढ़ सकता है।

क्या है नुकसान और क्या बरतें सावधानी
यदि ओजोन सांसों के साथ शरीर के अंदर चला जाए तो फेफड़ों को सीधा नुकसान पहुंचाता है। ओजोन का हल्का सा असर भी छाती में दर्द, कफ, सांस की तकलीफ और गले में खराश पैदा कर सकता है। यदि किसी को अस्थमा या सांस से संबंधित दिक्कत है तो यह इन्हें गंभीर बना सकता है।

  • मास्क पहनें
  • अधिक ट्रैफिक वाली जगहों पर देर तक न रहें
  • बहुत तेज धूप होने पर बाहर नहीं निकलें
  • तेज होने में और दोपहर के समय इसका स्तर सबसे अधिक रहता है

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