Delhi Pollution: दिल्ली में बिना PUC अपडेट कराए बाइक या स्कूटर दौड़ाए तो कटेगा 10 हजार का चालान

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Delhi Pollution: दिल्ली में बिना PUC अपडेट कराए बाइक या स्कूटर दौड़ाए तो कटेगा 10 हजार का चालान

नई दिल्ली: साल भर प्रदूषण से परेशान रहने वाली दिल्ली में पॉल्यूशन के विभिन्न कारणों की पड़ताल के दौरान एक चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि यहां वाहनों के धुएं से होने वाले प्रदूषण में सबसे बड़ा योगदान ट्रक, टेंपो या दूसरी भारी गाड़ियों का नहीं, बल्कि टू वीलर्स का है। ये न केवल संख्या में सबसे ज्यादा हैं, बल्कि PUC नॉर्म्स का सबसे ज्यादा उल्लंघन भी कर रहे हैं। इसे देखते हुए अब दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग ने इन पर नकेल कसने की तैयारी कर ली है।

सूत्रों के मुताबिक, ट्रांसपोर्ट विभाग ऐसे सभी टू वीलर्स मालिकों को नोटिस जारी करने वाला है और अगर उसके बाद भी ऐसे लोगों ने अपनी बाइक या स्कूटर की पॉल्यूशन जांच नहीं करवाई, तो फिर उन्हें 10 हजार रुपये का चालान भेजा जाएगा। इसके अलावा जिन लोगों के पास 15 साल से ज्यादा पुराने टू वीलर्स हैं, उन्हें भी यह चेतावनी दी जाएगी कि वे ऐसी गाड़ियों को सड़क पर ना चलाएं, अन्यथा उनकी गाड़ी जब्त कर ली जाएगी। ट्रांसपोर्ट विभाग ऐसी गाड़ियों की भी लिस्ट तैयार कर रहा है, जिनकी पिछले 6-8 महीने या साल भर से पीयूसी जांच नहीं हुई है। ऐसी गाड़ियों के मालिकों को भी नोटिस भेजकर 15 दिन के अंदर जांच कराने का निर्देश दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि पीयूसी अपडेट कराने के संबंध में लोगों को अभी से जागरूक किया जा रहा है, ताकि पॉल्यूशन बढ़ने पहले ही यह सुनिश्चित किया जा सके कि दिल्ली की सड़कों पर केवल वही गाड़ियां चलें, जिनका वेलिड पीयूसी हो।

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17 लाख गाड़ियों के पास नहीं है पीयूसी
सोमवार तक के आंकड़ों के आधार पर ट्रांसपोर्ट विभाग के सूत्रों ने बताया कि इस वक्त दिल्ली में रजिस्टर्ड करीब 17 लाख गाड़ियां ऐसी हैं, जिनके पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट की समय सीमा सोमवार को खत्म हो चुकी है और अभी तक उनकी दोबारा से पॉल्यूशन जांच नहीं कराई गई है। इनमें 13.65 लाख टू वीलर्स हैं, जबकि कारों की संख्या 3 लाख के आसपास है। 10 हजार के करीब अन्य पैसेंजर गाड़ियां और तकरीबन 21 हजार कमर्शल गुड्स वीकल्स हैं। हालांकि, वैलिड पीयूसी नहीं होने के बावजूद ये सभी गाड़ियां सड़कों पर भी चल रही हैं या नहीं, इस बारे में स्पष्ट रूप से कुछ कहना तो मुश्किल हैं, लेकिन माना यही जाता है कि इनमें से करीब 60-70 पर्सेंट गाड़ियां तो रोज सड़कों पर निकल ही रहीं होंगी। ऐसे में ये सभी गाड़ियां दिल्ली में प्रदूषण के स्तर को बढ़ाने का काम कर रही हैं।

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कमर्शल वीकल्स की कई लेवल पर चेकिंग
आमतौर पर ऐसी धारणा है कि ट्रक, ट्रॉले, टेंपो और अन्य कमर्शल गाड़ियां ज्यादा पॉल्यूशन फैलाती हैं, क्योंकि एक तो इनमें से ज्यादातर डीजल से चलती हैं और हैवी इंजन होने के कारण ये गाड़ियां धुआं भी ज्यादा छोड़ती हैं, लेकिन पीयूसी नियमों के पालन के मामले में इनका ट्रैक रिकॉर्ड प्राइवेट गाड़ियों से बेहतर हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इसका मुख्य कारण यह है कि विभिन्न एजेंसियों, जैसे ट्रैफिक पुलिस, ट्रांसपोर्ट विभाग, लोकल पुलिस या डीपीसीसी की टीमें लगातार सड़कों पर ऐसी गाड़ियों की चेकिंग करती रहती हैं। ऐसे में इनके ओनर्स और ड्राइवर्स को दस्तावेज अप टु डेट रखने पड़ते हैं। इसके अलावा फिटनेस जांच और इंश्योरेंस रिन्यूअल के समय भी वैध पॉल्यूशन सर्टिफिकेट को खासतौर से चेक किया जाता है। विभिन्न स्तरों पर और नियमित रूप से होने वाली इसी चेकिंग और सख्ती के चलते ही पीयूसी नियमों के पालन के मामले में कमर्शल गाड़ियों का ट्रैक रिकॉर्ड ज्यादा बेहतर है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि कई लोग जब किसी दूसरे राज्य में जाते हैं, तो वहीं पर गाड़ी की पीयूसी जांच करा लेते हैं। ऐसे में अगर वहां का सिस्टम एनआईसी के साथ डायरेक्ट इंटरलिंक्ड नहीं है, तो कई बार पीयूसी जांच हो जाने के बाद भी सिस्टम में उसे अपडेट होने में समय लगता है।

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