Delhi Metro News: बादली डिपो में 20 मेट्रो ट्रेनों का रखरखाव होगा प्राइवेट, DMRC ने शुरू की खर्चे कम करने की तैयारी

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Delhi Metro News: बादली डिपो में 20 मेट्रो ट्रेनों का रखरखाव होगा प्राइवेट, DMRC ने शुरू की खर्चे कम करने की तैयारी

नई दिल्ली: मौजूदा संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करके अपने खर्चों को कम करने में जुटी डीएमआरसी एक नई पहल करने जा रही है। अभी तक मेट्रो ट्रेनों के मेंटिनेंस का जिम्मा डीएमआरसी ही संभालती आई है, लेकिन अब मेट्रो स्टेशनों के मेंटिनेंस समेत कई अन्य सेवाओं की तरह ही ट्रेनों के रखरखाव का काम भी किसी कंपनी के हवाले करने की तैयारी हो रही है। इसकी शुरुआत येलो लाइन से की जा रही है।

डीएमआरसी के अधिकारियों के मुताबिक, बादली डिपो में येलो लाइन की 20 ट्रेनों का मेंटिनेंस आउटसोर्सिंग के जरिए किया जाएगा। इसके तहत मेंटिनेंस के काम से जुड़ी किसी अन्य कंपनी का चयन करके उसे इन ट्रेनों के रखरखाव का पूरा जिम्मा सौंपा जाएगा। डिपो में ट्रेनों के मेंटिनेंस से जुड़ी मशीनरी, वॉशिंग प्लांट्स, उपकरणों आदि का रखरखाव भी उसी कंपनी को करना होगा। यह एक तरह से फेज-4 में बड़े स्तर पर की जाने वाली इसी तरह की पहल का ट्रायल होगा, क्योंकि डीएमआरसी फेज-4 में बन रही नई सिल्वर लाइन की ट्रेनों के रखरखाव का जिम्मा भी पूरी तरह से किसी और कंपनी के सुपुर्द करने का फैसला कर चुकी है।

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10 साल के लिए सौंपा जाएगा मेंटिनेंस का काम
अधिकारियों ने बताया कि ट्रेनों के मेंटिनेंस के काम को आउटसोर्स करने के लिए कंपनी का चयन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जो कॉन्ट्रैक्ट साइन किया जाएगा, उसके तहत चुनी गई कंपनी को 10 साल के लिए यह काम सौंपा जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर डीएमआरसी यह नई पहल कर रही है, ताकि मेंटिनेंस की लागत में कमी लाई जा सके। अधिकारियों का कहना है कि ट्रेनों के मेंटिनेंस की प्रक्रिया में जरूरी सुधार और बदलाव करके उसे अधिक उपयोगी बनाने, उपलब्ध मैनपावर का प्रभावी और अधिकतम इस्तेमाल करने और दुनियाभर में मेट्रो ट्रेनों के मेंटिनेंस के लिए अपनाई जा रही अत्याधुनिक और नई प्रक्रियाओं को अपनाने के अपने प्रयासों के तहत ही डीएमआरसी यह कदम उठा रही है। मेंटिनेंस का काम आउटसोर्स किए जाने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि फेज-4 में आने वाली नई ट्रेनों के मेंटिनेंस के लिए अलग से नया स्टाफ रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि डीएमआरसी अपनी मौजूदा मैनपावर को ही अलग-अलग डिपो में तैनात करके उनकी मदद से फेज-4 की ट्रेनों के मेंटिनेंस का काम भी सुचारू रूप से करवा सकेगी।

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दो कंपनियों को किया गया है शॉर्टलिस्ट
ट्रेनों के मेंटिनेंस का काम आउटसोर्स करने के लिए शुरू की गई टेंडर प्रक्रिया एडवांस स्टेज में है। डीएमआरसी ने इच्छुक कंपनियों का पता लगाने के लिए जो एक्सप्रेस ऑफ इंटरेस्ट नोटिस जारी किया था, उसमें शामिल हुई कंपनियों का मूल्यांकन करने के बाद बोली लगाने वाली दो कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है, जो ट्रेनों के निर्माण और मेंटिनेंस के क्षेत्र में वैश्विक अनुभव रखती हैं। अब चयन के अगले चरण की प्रक्रियाएं चल रही हैं। टेंडर प्रोसेस इस साल के आखिर तक पूरा हो जाएगा। इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत मुख्य रूप से जो काम सौंपे जाएंगे, उनमें सभी प्रिवेंटिव और करैक्टिव मेंटिनेंस वर्क, ट्रेनों की ओवरहॉलिंग और उससे जुड़े अन्य काम, ट्रेनों की धुलाई-सफाई और बादली डिपो के रखरखाव का काम शामिल होगा। कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने वाली कंपनी के काम की भी लगातार निगरानी की जाएगी और विश्वसनीयता, उपलब्धता, रखरखाव और सुरक्षा इन चार प्रमुख पैमानों के आधार पर कंपनी के परफॉर्मेंस का आकलन किया जाएगा।

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अन्य शहरों में भी हो रही इसी तरह की पहल
डीएमआरसी के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अनुज दयाल के मुताबिक, अभी तक डिपो में मेट्रो ट्रेनों के मेंटिनेंस के लिए डीएमआरसी अपनी खुद की मैनपावर का ही इस्तेमाल करती आई है। मगर अब नोएडा, चैन्नै, हैदराबाद, मुंबई समेत देश के कई अन्य शहरों में चल रही मेट्रो ट्रेनों के रखरखाव का काम अलग-अलग तरीके से आउटसोर्स किया जा रहा है। बीओटी (बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर) मॉडल के साथ-साथ जिन कंपनियों से ट्रेनें खरीदी जा रही हैं, उन्हीं को मेंटिनेंस का काम सौंपने जैसे कुछ अन्य मॉडल्स भी अपनाए जा रहे हैं। हालांकि, डीएमआरसी की यह पहल देश में अपनी तरह की पहली और अनूठी पहल होगी, जिसमें केवल ट्रेनों के मेंटिनेंस का काम किसी अन्य कंपनी को सौंपने का फैसला किया गया है। इससे कई अन्य प्राइवेट कंपनियां भी देश में ट्रेनों के मेंटिनेंस का जिम्मा संभालने जैसे अनछुए क्षेत्र में काम करने के लिए प्रेरित होंगी।

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