यौन उत्पीड़न मामला: बृजभूषण शरण सिंह को बरी करने के फैसले को चुनौती, अदालत ने जारी किया नोटिस
महिला पहलवानों द्वारा दायर यौन उत्पीड़न मामले में भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, दिल्ली की एक अदाल…
महिला पहलवानों द्वारा दायर यौन उत्पीड़न मामले में भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, दिल्ली की एक अदालत ने बृजभूषण और सह-आरोपी विनोद तोमर को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर उन्हें नोटिस जारी किया है।
यह नोटिस राऊज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश दिग्विजय सिंह ने सोमवार को चार महिला पहलवानों की अपील पर सुनवाई करते हुए जारी किया। पहलवानों ने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें बृजभूषण और WFI के पूर्व सचिव विनोद तोमर को आरोपों से मुक्त कर दिया गया था। इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 9 अक्टूबर की तारीख तय की गई है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद 2023 में तब सामने आया जब देश की कई प्रतिष्ठित महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर गंभीर आरोप लगाए। आरोपों के मुताबिक, 2016 से 2022 के बीच विभिन्न राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, प्रशिक्षण शिविरों और WFI कार्यालय में उनके साथ अनुचित व्यवहार और यौन उत्पीड़न किया गया था। इस मामले में विनोद तोमर को सह-आरोपी बनाया गया था।
शिकायतों के आधार पर पुलिस ने 15 जून, 2023 को बृजभूषण के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद, ट्रायल कोर्ट ने 10 मई, 2024 को उन पर यौन उत्पीड़न और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने जैसे आरोप तय किए थे।
निचली अदालत के फैसले को चुनौती
हालांकि, 3 अगस्त को दिल्ली की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने बृजभूषण सिंह और विनोद तोमर, दोनों को बरी कर दिया था। अब चार महिला पहलवानों ने इसी फैसले के खिलाफ सेशन कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अपनी याचिका में उन्होंने कहा है कि मजिस्ट्रेट कोर्ट का फैसला कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं है और इसमें सबूतों का गलत आकलन किया गया है। पहलवानों का यह भी कहना है कि निचली अदालत ने गवाहों के बयानों को नजरअंदाज कर छोटी-मोटी बातों पर ध्यान केंद्रित किया और पीड़िता के व्यवहार को लेकर रूढ़िवादी सोच के आधार पर फैसला सुनाया।
इनपुट: IANS



