यौन उत्पीड़न मामला: कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजाम की JNU से बर्खास्तगी पर दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाई रोक
मणिपुर से कांग्रेस सांसद और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के प्रोफेसर अंगोचमा बिमोल अकोइजाम को दिल्ली हाईकोर्ट से एक बड़ी अंतरिम राहत मिली है। अदालत ने यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद JNU प्रशासन…
मणिपुर से कांग्रेस सांसद और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के प्रोफेसर अंगोचमा बिमोल अकोइजाम को दिल्ली हाईकोर्ट से एक बड़ी अंतरिम राहत मिली है। अदालत ने यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद JNU प्रशासन द्वारा उन्हें सेवा से बर्खास्त करने के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह रोक मामले में अंतिम फैसला आने तक प्रभावी रहेगी।
JNU प्रशासन ने विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रोफेसर अकोइजाम के खिलाफ कार्रवाई की थी। कुलपति ने रिपोर्ट के निष्कर्षों को मानते हुए उन्हें बर्खास्त करने का आदेश जारी किया था, जिसे अकोइजाम ने अदालत में चुनौती दी थी। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों और विश्वविद्यालय की कार्रवाई को एक साजिश करार दिया है।
आपराधिक मामले में अग्रिम जमानत की अर्जी
एक तरफ जहाँ हाईकोर्ट ने उनकी बर्खास्तगी पर रोक लगाई है, वहीं दूसरी ओर अकोइजाम ने इसी मामले से जुड़े आपराधिक केस में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की है। उनकी इस याचिका पर 3 नवंबर को सुनवाई होने की संभावना है। दरअसल, JNU में प्रोफेसर रहने के दौरान 11 छात्राओं ने उन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे, जिसके आधार पर दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ FIR दर्ज की है और जांच कर रही है।
जांच में सहयोग और 'राजनीतिक मामला' होने का दावा
अक्टूबर महीने में अकोइजाम दिल्ली पुलिस के समन पर वसंत कुंज नॉर्थ थाने में जांच में शामिल हुए थे। उस समय उन्होंने कहा था कि वह जांच में पूरा सहयोग करेंगे ताकि उनकी अनुपस्थिति को जांच से बचने का प्रयास न समझा जाए। शुरुआत से ही वह इस पूरे प्रकरण को एक "राजनीतिक मामला" बताते रहे हैं। उन्होंने JNU प्रशासन की कार्रवाई की तुलना "खाप पंचायत" की कार्यवाही से करते हुए न्याय-प्रणाली पर भरोसा जताया था।
इस मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष रुपकुमारी चौधरी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सांसद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की थी। फिलहाल, हाईकोर्ट से मिली राहत के बावजूद आपराधिक मामले की जांच जारी है और सभी की निगाहें उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर अदालत के फैसले पर टिकी हैं।
इनपुट: IANS



