दिल्ली हाईकोर्ट ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार को दिया ये आदेश

0
दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को महिलाओं और बच्चों के लिए दिल्ली शहर को सुरक्षित बनाने के लिए कई दिशा-निर्देश दिए और सुझाव दिया कि ज्यादा संगीन अपराध वाले स्थानों पर सादे कपड़ों में महिला पुलिस की तैनाती की जाये।

हाईकोर्ट भयावह निर्भया कांड के बाद से शहर में पुलिसिंग को बेहतर बनाने के प्रयासों की निगरानी कर रहा है। हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को यह जांचने का निर्देश दिया कि निर्भया फंड में जमा बड़ी राशि का सबसे अच्छा उपयोग कैसे किया जा सकता है। आपको बता दें कि यह फंड 2013 में स्थापित किया गया था।

शुक्रवार को जस्टिस जीएस सिस्तानी और अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने कहा कि “चूंकि फण्ड के द्वारा बड़ी राशि उपलब्ध है, हम मुख्य सचिव को और बड़े अफसरों को निर्देश देते हैं कि वे इस बात की जांच करें कि शहर में महिलाओं और बच्चों को वर्दी सुरक्षा प्रदान करने के लिए इसका उपयोग कैसे किया जा सकता है।”

इस फंड का उपयोग सुनिश्चित करना चाहिए और महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध पर अंकुश लगाने में मदद करनी चाहिए। कोर्ट को पुलिस द्वारा पहले सूचित किया गया था कि निर्भया फंड में अप्रयुक्त राशि 2017 में 3,200 करोड़ रुपये से अधिक थी। 1,000 करोड़ रुपये उन परियोजनाओं के लिए रखे गए जो अभी तक शुरू नहीं हुए हैं।

दिल्ली पुलिस का प्रतिनिधित्व कर रहे राहुल मेहरा ने पीठ को सूचित किया कि चार साल पहले 61,000 पुलिसकर्मियों की कमी थी, और अब यह पद 52,000 है। उन्होंने लंबे समय तक ड्यूटी का समय, कार्यभार का बोझ और पुलिस के कम वेतन पर कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया।

कोर्ट ने तब केंद्र से कहा कि वह दिल्ली पुलिस की सैलरी बढ़ाने के मुद्दे की फिर से जांच करे और मौजूदा खाली पदों को भरने के लिए तुरंत कदम उठाए। इसने मुख्य सचिव से यह भी जवाब देने को कहा कि क्या निदेशालय सामान्य पुनर्वास (डीजीआर) से जनशक्ति नियोजित करना संभव है।

यह भी पढ़ें: जाने दूसरे देश में रेप मामले की सजा ?

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस उपायुक्त (डीसीपी), अपराध शाखा से कहा कि वे संगीन अपराध वाले स्थानों पर महिला अधिकारियों की उपस्थिति पर विचार करें। अधिवक्ता मीरा भाटिया ने सुझाव दिया कि महिलाओं के खिलाफ अपराध से संबंधित सभी मामलों की निगरानी और जांच के लिए एक विशेष सेल बनाया जाए, लेकिन कोर्ट ने कहा कि जो महत्वपूर्ण है वह यह है कि ऐसी सभी अपराध जांच की निगरानी वरिष्ठ पुलिस द्वारा की जाती है।

अगर यह आवश्यक है कि कोर्ट को इस तरह के मामलों में हस्तक्षेप करना पड़े, तो यह दिल्ली और केंद्र सरकार के लिए एक बड़ी शर्म की बात है। राजनेता क्या कर रहे हैं?