पाकिस्तान से भारत लौटी गीता को इंदौर से उज्जैन भेजने का विचार, माता-पिता की खोज जारी

पाकिस्तान से साल 2015 में भारी चर्चा और विचार-विमर्श के बाद भारत लौटी मूक-बधिर लड़की गीता को इंदौर से उज्जैन भेजे जाने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है. इस सिलसिले में मध्यप्रदेश सरकार के दो विभागों के बीच पत्राचार किया गया है.

इस वक़्त गीता, प्रदेश सरकार के सामाजिक न्याय और नि:शक्त कल्याण विभाग की देखरेख में इंदौर की गैर सरकारी संस्था “मूक-बधिर संगठन” के गुमाश्ता नगर स्थित आवासीय परिसर में रह रही है. फिलहाल सरकार उसके माता-पिता की खोज में जुटी है.

आखिर क्यूँ भेजा जा रहा है उज्जैन?

मीडिया से बात करते हुए विभाग के संयुक्त संचालक बी सी जैन ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि गीता को उज्जैन के किसी संस्था में भेजे जाने की संभावित प्रक्रिया के बारे में महिला एवं बाल विकास विभाग के एक अधिकारी के सरकारी पत्र का जवाब दिया गया है. हालांकि इस बारे में विस्तृत जानकारी दिये बगैर उन्होंने कहा, “गीता को इंदौर से बाहर भेजे जाने के बारे में फिलहाल जिला प्रशासन को विदेश मंत्रालय का कोई आदेश नहीं मिला है. अगर हमें इस बारे में कोई आदेश मिलता है, तो हम इसका पालन करेंगे.” जैन ने यह स्पष्ट नहीं किया कि आख्रिर किस वजह से गीता को इंदौर से उज्जैन भेजे जाने पर विचार किया जा रहा है.

वहीँ गीता को इंदौर से उज्जैन भेजे जाने के मुद्दे पर इंदौर के जिलाधिकारी निशांत वरवड़े ने कहा कि उन्हें इस प्रस्ताव के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है. उन्होंने कहा, “गीता भारत की बेटी हैं, उसकी बेहतरी के लिए हमें जो भी कदम उठाने होंगे, हम जरूर उठाएंगे.”

मूक-बधिर संगठन की सांकेतिक भाषा विशेषज्ञ मोनिका पंजाबी वर्मा ने इस संस्था में रह रही गीता की मौजूदा स्थिति को लेकर पूछे गये सवालों पर कोई जवाब नहीं दिया. उन्होंने कहा, “गीता की स्थिति को लेकर हम जिला प्रशासन को नियमित तौर पर रिपोर्ट भेजते रहते हैं. आप इस बारे में प्रशासन से बात कीजिये.”

कई लोगों ने माता-पिटा होने का दावा किया   

बहरहाल, गीता को पाकिस्तान से भारत लौटे दो साल से ज्यादा वक्त बीत चुका है. लेकिन अब तक उसके माता-पिता का पता नहीं चल सका है. अब तक देश के अलग-अलग इलाकों के 10 से ज्यादा परिवार गीता को अपनी लापता बेटी बता चुके हैं. लेकिन सरकार की जांच में इनमें से किसी भी परिवार का इस मूक-बधिर युवती पर वल्दियत का दावा फिलहाल साबित नहीं हो सका है.

बता दें कि गीता 7-8 साल की उम्र में पाकिस्तानी रेंजर्स को समझौता एक्सप्रेस में लाहौर रेलवे स्टेशन पर मिली थी. गलती से सरहद पार पहुंचने वाली यह मूक-बधिर युवती विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के विशेष प्रयासों के कारण 26 अक्तूबर 2015 को स्वदेश लौटी थी. इसके अगले ही दिन उसे इंदौर में मूक-बधिरों के लिए चलायी जा रही गैर सरकारी संस्था के आवासीय परिसर भेज दिया गया था. तब से गीता इसी परिसर में रह रही है.