DDCA की नाक के नीचे कैसे हुआ सट्टेबाजी का खेल?

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DDCA की नाक के नीचे कैसे हुआ सट्टेबाजी का खेल?

नई दिल्ली: दिल्ली एंड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट असोसिएशन (DDCA) की नाक के नीचे सट्टेबाज अरुण जेटली स्टेडियम के भीतर घुसकर अपना काला कारोबार चला रहे थे। इससे पता चलता है कि कोटला के भीतर सट्टेबाजों की जड़ें कितनी गहरी हैं। सूत्रों का दावा है कि कृष्ण गर्ग और मनीष कंसल नाम के ये दोनों सट्टेबाज 7 से 14 मार्च तक कोटला में खेले गए विजय हजारे ट्रोफी वनडे टूर्नामेंट के नॉकआउट मुकाबलों के दौरान भी देखे गए थे। इसलिए डीडीसीए के किसी कद्दावर शख्सियत के तार इनसे जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, सट्टेबाजी का एक पूरा सिंडिकेट काम कर रहा था। सुनियोजित साजिश के तहत एक्रीडिटेशन कार्ड बनवाए गए हैं। मैदान और स्टेडियम में घुसने के लिए कड़े नियम बनाए गए थे। कम से कम स्टाफ को मैचों में बुलाया जा रहा था। ऐसे में सट्टेबाजों के ‘गैंग’ का कोटला में दरवाजा खोलकर स्वागत करने से साजिशकर्ताओं की जड़ें गहरी लग रही हैं। सूत्रों ने बताया कि हर डिपार्टमेंट से मैचों के लिए एक्रीडिटेशन कार्ड की लिस्ट मंगवाई गई थी। साउथ एमसीडी की लिस्ट में स्वरूप नगर के कृष्ण गर्ग का नाम बाद में चढ़ाया गया।

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इसी तरह हाउसकीपिंग के लिए आउटसोर्स की गई कंपनी आईबीएस फैसिलिटी मैनेजमेंट की तरफ से आई लिस्ट में मनीष कंसल और पिछले मैचों में दो मोबाइल छोड़कर फरार हुए शख्स का नाम जोड़ा गया। सूत्रों का कहना है कि हाउसकीपिंग की तरफ से 45 लोगों की लिस्ट में ये दोनों नाम भी थे। हाउसकीपिंग कंपनी के असली सुपरवाइजर से पूछताछ चल रही है। सूत्रों के मुताबिक, सुपरवाइजर दावा है कि ये दोनों नाम डीडीसीए की तरफ से डाले गए थे और उनकी कंपनी का इनसे कोई लेना-देना नहीं है। लिहाजा डीडीसीए अब शक के घेरे में है।

डीडीसीए सूत्रों ने बताया कि फिलहाल बतौर प्रशासक काम देख रहे नीरज शर्मा एक्रीडिटेशन कार्ड बनाने का काम देख रहे थे। वह अप्रूवल करते थे, तभी कार्ड बनाए जाते थे। दिल्ली पुलिस का कहना है कि डीडीसीए की तरफ से अभी उनको रेकॉर्ड नहीं सौंपे गए हैं। इस पर डीडीसीए के सूत्रों ने बताया कि सारे रेकॉर्ड एक कर्मचारी विक्रांत रावत के पास हैं, जो फिलहाल कोरोना से पीड़ित हैं, इसलिए अब तक पुलिस को यह रेकॉर्ड नहीं सौंपा जा सका है।

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सूत्रों का दावा है कि एक चपरासी के जरिए कृष्ण का नाम साउथ एमसीडी की लिस्ट में चढ़वाया गया। वह फिलहाल दिल्ली से बाहर है, जिसका फोन भी बंद आ रहा है। यह चपरासी डीडीसीए के डायरेक्टर का खास बताया जा रहा है। पुलिस चपरासी की तलाश में जुटी है और एक्रीडिटेशन के सारे रेकॉर्ड का इंतजार है। पुलिस का दावा है कि गिरफ्तार कृष्ण और मनीष पूछताछ में गुमराह कर रहे हैं। दोनों ने अभी तक खुलासा नहीं किया है कि उन्होंने कार्ड किसके जरिए बनवाए थे।

स्टेडियम में आकर होता क्या है
मैदान और टीवी में तकरीबन एक बॉल का अंतर होता है। पंटरों से बुकी टीवी देखकर दांव लगवाते हैं। स्टेडियम में बुकियों का बैठा आदमी पहले ही बता देता है कि टीवी में आने वाली अगली बॉल में क्या होने वाला है। इससे वह लाखों वारे-न्यारे कर जाते हैं, जबकि पंटर हाथ मलता रह जाता है। इस तरह बुकीज एक ही मैच में करोड़ों का कारोबार कर जाते हैं।

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