Darbhanga News: दांव पर संस्कृत विश्वविद्यालय के हजारों छात्रों का भविष्य , कॉपी न होने से 2020 के बाद नहीं हुई एक भी परीक्षा

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Darbhanga News: दांव पर संस्कृत विश्वविद्यालय के हजारों छात्रों का भविष्य , कॉपी न होने से 2020 के बाद नहीं हुई एक भी परीक्षा

दरभंगा: अभी हाल ही में एक मृत कर्मी की विधवा की पेंशन का भुगतान नहीं होने के कारण बिहार के एकमात्र संस्कृत विश्वविद्यालय कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत यूनिवर्सिटी ( Darbhanga Sanskrit University ) के कुलपति को पुलिस ने गिरफ्तार कर पटना हाईकोर्ट में पेश किया था। अब अपनी कारस्तानी के कारण यह विश्वविद्यालय एक बार फिर चर्चा में है। विश्वविद्यालय ने अपने हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा दिया है। यहां उत्तर पुस्तिकाएं नहीं छपने के कारण वर्ष 2020 के बाद से एक भी परीक्षा नहीं हुई है। इसकी वजह से सत्र काफी लेट हो गया है। विवि में उपशास्त्री (इंटर), शास्त्री (स्नातक), आचार्य (पीजी), पीएचडी और कई विषयों में डिप्लोमा-सर्टिफिकेट की पढ़ाई होती है। अभी हाल ही में संस्कृत विवि ने ललित नारायण मिथिला विवि के प्रेस से परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं छापने का आग्रह किया था। एलएनएमयू ने ऐन मौके पर उत्तर पुस्तिकाएं छापने से मना कर दिया। इसकी वजह से 27 जुलाई से होने वाली परीक्षाएं एक बार फिर टल गई है। इससे परेशान छात्र अब कुलपति कार्यालय के सामने आत्महत्या करने की धमकी दे रहे हैं।

कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय का इतिहास गौरवशाली रहा है। इसकी स्थापना 26 जनवरी 1961 को दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह ने की थी। इसके लिए उन्होंने अपना बेशकीमती लक्ष्मीविलास पैलेस दान में दे दिया था। एक समय यह विवि देश भर में प्राच्य विद्या का बड़ा और प्रतिष्ठित केंद्र माना जाता था। यहां भारत के साथ-साथ दुनिया के कई देशों से छात्र संस्कृत पढ़ने आते थे। यह संयुक्त बिहार का एकमात्र संस्कृत विवि रहा है।

तीन सेमेस्टर की परीक्षा बाकी
संस्कृत विवि के आचार्य (पीजी) 2019-21 के छात्र दीपेश कुमार ने कहा कि जब से उन्होंने एडमिशन लिया है तब से उनकी सिर्फ एक सेमेस्टर की परीक्षा हुई है। उसका भी रिजल्ट नहीं आया है। अभी तीन सेमेस्टर की परीक्षा बाकी है। उन्होंने कहा कि इसी जिले में राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, नई दिल्ली से संबद्ध कॉलेज भी है, जहां सेशन समय पर चल रहा है। उनके बैच के छात्र वहीं से दो साल में डिग्री लेकर निकल चुके हैं। उन्होंने कहा कि वे किसी भी कंपीटिटिव एक्जाम में शामिल नहीं हो सकते हैं। यूपी में टीजीटी की वैकेंसी आई है लेकिन वे उसमें आवेदन नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब वे कुलपति के सामने आत्महत्या करेंगे।

संस्कार के बोझ से दबे हैं
एक अन्य छात्र रोहित कुमार झा ने कहा कि वे लोग संस्कृत के छात्र हैं, इसलिए संस्कार के बोझ से दबे हैं। वे उग्र आंदोलन नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विवि के शिक्षकों को दो-ढाई लाख रुपये वेतन मिलते हैं। वे आराम से रहते हैं इसलिए वे छात्रों की तकलीफ नहीं समझते हैं।

15 अगस्त के बाद ही ली जाएंगी परीक्षाएं

वहीं, इस मामले में कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि के कुलपति प्रो. शशिनाथ झा ने कहा कि 2020 के बाद से उपशास्त्री से लेकर आचार्य तक की सभी परीक्षाएं लंबित हैं। उन्होंने कहा कि ललित नारायण मिथिला विवि के प्रेस को उत्तर पुस्तिकाएं छापने की जवाबदेही दी गई थी लेकिन उसने ऐन मौके पर इससे मना कर दिया। उन्होंने कहा कि अब 15 अगस्त के बाद ही परीक्षाएं ली जाएंगी। इसके लिए टेंडर निकाला जा रहा है।

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