दक्षिण कोरिया: गर्भपात की गोलियों पर प्रस्तावित नियम कितने सख्त? ह्यूमन राइट्स वॉच ने उठाए सवाल
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने दक्षिण कोरिया में गर्भपात की गोलियों (Abortion Pills) को लेकर बनाए जा रहे प्रस्तावित नियमों पर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि सरकार का यह…
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने दक्षिण कोरिया में गर्भपात की गोलियों (Abortion Pills) को लेकर बनाए जा रहे प्रस्तावित नियमों पर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि सरकार का यह कदम महत्वपूर्ण तो है, लेकिन अत्यधिक सख्त प्रतिबंध महिलाओं के लिए सुरक्षित और सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को मुश्किल बना सकते हैं।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, न्यूयॉर्क स्थित इस संगठन ने रविवार को जारी अपने एक बयान में दक्षिण कोरियाई सरकार से इन दवाओं तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने की अपील की है। सरकार अगले साल से इन गोलियों के औपचारिक इस्तेमाल को अनुमति देने की तैयारी कर रही है।
प्रस्ताव में क्या है और आपत्ति क्यों?
सितंबर में दक्षिण कोरियाई सरकार ने घोषणा की थी कि वह गर्भावस्था के नौ सप्ताह तक गर्भपात की दवाओं के इस्तेमाल को मंजूरी देगी। ह्यूमन राइट्स वॉच ने इसी प्रस्ताव के दो मुख्य पहलुओं पर आपत्ति जताई है:
1. समय-सीमा: प्रस्तावित नियम गर्भपात के लिए गोलियों के इस्तेमाल को गर्भावस्था के शुरुआती नौ सप्ताह तक सीमित करते हैं। संगठन का तर्क है कि चिकित्सा के प्रचलित मानक 12 सप्ताह तक दवाओं के जरिए गर्भपात की अनुमति का समर्थन करते हैं।
2. सीमित पहुंच: प्रस्ताव के अनुसार, शुरुआती दो वर्षों में सिर्फ बड़े चिकित्सा संस्थानों के डॉक्टर ही ये दवाएं लिख और उपलब्ध करा सकेंगे। एचआरडब्ल्यू का मानना है कि इससे महिलाओं, विशेषकर दूर-दराज के इलाकों में रहने वालों, के लिए समय पर चिकित्सा सहायता पाना मुश्किल हो जाएगा।
कानूनी स्थिति और आगे की राह
दक्षिण कोरिया की संवैधानिक अदालत ने 2019 में ही गर्भपात पर लगे प्रतिबंध को असंवैधानिक करार दिया था, लेकिन तब से कानूनों में आवश्यक संशोधन नहीं हो पाए हैं। इस वजह से एक नियामकीय खालीपन बना हुआ था। सरकार का कहना है कि इन गोलियों को एक औपचारिक व्यवस्था में लाने का उद्देश्य महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा की रक्षा करना है।
इस संदर्भ में, एचआरडब्ल्यू की कार्यवाहक महिला अधिकार शोध सहायक सुजैन बर्गस्टेन ने कहा, "पिल्स के इस्तेमाल की अनुमति देना महत्वपूर्ण है, लेकिन दक्षिण कोरिया को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नियम इतने सख्त न हों कि महिलाएं अबॉर्शन के अधिकार से वंचित न रह जाएं या उनका खर्च वहन करना मुश्किल हो जाए।" संगठन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सिफारिशों का हवाला देते हुए कहा कि उचित प्रशिक्षण प्राप्त स्वास्थ्यकर्मियों का एक बड़ा समूह यह सेवा दे सकता है।
ह्यूमन राइट्स वॉच ने दक्षिण कोरिया की नेशनल असेंबली से गर्भपात कानूनों को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप बनाने और इन सेवाओं को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा के तहत लाने की भी अपील की है।
इनपुट: IANS



