परमाणु ऊर्जा वाली पनडुब्बी: दक्षिण कोरिया ने IAEA के साथ शुरू की औपचारिक बातचीत
परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों के अपने महत्वाकांक्षी कार्यक्रम को लेकर दक्षिण कोरिया ने एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सियोल ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा…
परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों के अपने महत्वाकांक्षी कार्यक्रम को लेकर दक्षिण कोरिया ने एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सियोल ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को आधिकारिक तौर पर सूचित कर दिया है कि वह इस सैन्य परियोजना के लिए एक विशेष सुरक्षा समझौते पर बातचीत शुरू करना चाहता है। IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने सोमवार को वियना में एजेंसी के 'बोर्ड ऑफ गवर्नर्स' की बैठक में इस घटनाक्रम की पुष्टि की।
दक्षिण कोरिया की योजना ऐसे पनडुब्बी बनाने की है जो पारंपरिक हथियारों से लैस होंगी। इनमें परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल केवल लंबे समय तक पानी के भीतर संचालन (प्रणोदन) के लिए किया जाएगा, न कि परमाणु हथियार ले जाने के लिए। यह बातचीत IAEA के व्यापक सुरक्षा समझौते के अनुच्छेद 14 के तहत हो रही है। यह प्रावधान सदस्य देशों को परमाणु सामग्री का उपयोग गैर-हथियार सैन्य उद्देश्यों के लिए करने की अनुमति देता है, लेकिन इसके लिए एजेंसी के साथ एक विशेष निगरानी व्यवस्था स्थापित करना अनिवार्य है।
अप्रसार की चिंताएं और सुरक्षा उपाय
इस परियोजना को लेकर सबसे बड़ी चिंता परमाणु अप्रसार को लेकर है। हालांकि, IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी पहले ही कह चुके हैं कि यदि सियोल और एजेंसी के बीच एक मजबूत और स्पष्ट सुरक्षा व्यवस्था बनती है, तो अप्रसार को लेकर चिंता का कोई कारण नहीं होगा। सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती यह सुनिश्चित करना होगी कि पनडुब्बी के संचालन के दौरान उसमें मौजूद परमाणु सामग्री का सटीक हिसाब-किताब लगातार रखा जा सके।
दक्षिण कोरिया ने IAEA को परमाणु अप्रसार संधि (NPT) समेत अपनी सभी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को पूरी तरह निभाने का भरोसा दिलाया है। IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, सियोल ने इस संबंध में एजेंसी को आवश्यक घोषणाएं भी सौंप दी हैं। घरेलू स्तर पर भी, दक्षिण कोरिया ने जुलाई में एक विशेष कानून का प्रस्ताव रखा था, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि देश परमाणु हथियार विकसित, निर्मित या हासिल नहीं करेगा।
परियोजना का लक्ष्य और समयसीमा
यह पहल पिछले साल अमेरिका के साथ हुए सुरक्षा समझौतों के बाद तेज हुई है, जिसे लागू करने के लिए दोनों देशों ने जून में बातचीत भी शुरू की थी। दक्षिण कोरिया का लक्ष्य अपनी पहली परमाणु-संचालित पनडुब्बी को 2030 के दशक के मध्य तक लॉन्च करना है और दशक के अंत तक उसे अपनी नौसेना में शामिल करना है। यह कदम कोरियाई प्रायद्वीप में बढ़ते तनाव के बीच उठाया जा रहा है, जहां उत्तर कोरिया भी अपनी नौसैनिक और परमाणु क्षमताओं का तेजी से विस्तार कर रहा है।
इनपुट: IANS



