Crypto latest news: बिटकॉइन की ‘खुदाई’ पर भी अब टैक्स की तैयारी, GST रेट पर सोच रही सरकार

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Crypto latest news: बिटकॉइन की ‘खुदाई’ पर भी अब टैक्स की तैयारी, GST रेट पर सोच रही सरकार

नई दिल्ली: बिटकॉइन (Bitcoin) जैसी डिजिटल एसेट्स (digital assets) पर टैक्स और बढ़ सकता है। क्रिप्टोकरेंसीज से होने वाली कमाई पर 30 फीसदी टैक्स लगाने के बाद अब सरकार इनकी माइनिंग और सप्लाई पर भी जीएसटी (GST) लगाने के बारे में सोच रही है। अभी सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) में इस पर मंथन चल रहा है और इस बारे में जीएसटी काउंसिल (GST Council) में प्रस्ताव लाने की तैयारी है।

CBIC के चेयरमैन विवेक जौहरी ने ईटी के साथ एक इंटरव्यू में कहा कि डिजिटल एसेट्स के कई पहलू ऐसे हैं जो जीएसटी के दायरे में आते हैं। बजट में वर्चुअल डिजिटल करेंसीज पर एक अप्रैल, 2022 से 30 फीसदी कैपिटल गेन्स टैक्स (capital gains tax) लगाने का प्रस्ताव रखा गया था। अब डिजिटल एसेट्स के दूसरी तरह के लेनदेन पर जीएसटी लगाने की तैयारी है। इससे क्रिप्टोकरेंसीज पर टैक्स काफी बढ़ सकता है।

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कितना टाइम लगेगा
जौहरी ने कहा कि किसी प्लेटफॉर्म या किसी एक्सचेंज प्रोवाइडर की सर्विसेज को साफ तौर पर टैक्सेबल सर्विसेज के रूप में परिभाषित किया गया है और उन पर टैक्स वसूला जा रहा है। लेकिन सप्लाई से जुड़े कई सवालों पर अभी काफी मंथन की जरूरत है। अगर आप क्रिप्टो माइन करते हैं तो पहला सवाल यह है कि इसमें सप्लाई का मामला है या नहीं। इस तरह के सभी पहलुओं पर विभाग गौर कर रहा है।

जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक मार्च में होनी है। यह पूछे जाने पर कि क्या इस बैठक में इस मुद्दे पर विचार हो सकता है, जौहरी ने कहा कि हम प्रयास कर रहे हैं लेकिन यह पहले लॉ कमेटी के पास जाएगा और फिर उसके बाद काउंसिल में पहुंचेगा। अभी सीबीआईसी इस पर विचार कर रहा है और इसमें दो-तीन महीने का समय लग सकता है।

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क्या होती है बिटकॉइन माइनिंग?

क्रिप्टो माइनिंग या बिटकॉइन माइनिंग का मतलब पजल्स को सॉल्व करके नई बिटकॉइन बनाना है। जिस तरह हम किसी को पैसे भेजने को लिए कोई ट्रांजेक्शन करते हैं तो वह पहले बैंक के पास जाती है और फिर बैंक उसे वैलिडेट कर के आगे भेजता है। क्रिप्टोकरंसी के मामले में कॉइन भेजने वाले उसे रिसीव करने वाले के बीच में बैंक जैसा कुछ नहीं होता है, बल्कि सिर्फ कंप्यूटर्स होते हैं। इन कंप्यूटर्स को कुछ लोग चलाते हैं, जिसके जरिए हर ट्रांजेक्शन वैलिडेट होती है। उनकी इस मेहनत के बदले उन्हें बिटकॉइन मिलते हैं। इसे ही बिटकॉइन माइनिंग कहते हैं। अन्य क्रिप्टोकरंसी में भी इसी तरह माइनिंग होती है।

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