जानिए क्या सच में सुधरी है लड़कियों की शिक्षा?

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देश में शिक्षा के सुधार के लिए कई कदम उठाये जा रहे है , सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय उच्चतर अभियान, बेटी बचाओ ,बेटी पढ़ाओ जैसी योजना से को देश में आरंभ किया ताकि सभी बच्चों को अच्छी शिक्षा प्रदान की जा सके। सरकारी स्कूल में शिक्षा को उत्तम स्तर पर ले जाने के लिए बहुत सी सुविधाएं उपलब्ध कराई। परन्तु फिर भी ऐसे बहुत से बच्चे है जो अभी भी आधारिक शिक्षा से वंचित है। जिस देश में बेटी बचाओ ,बेटी पढ़ाओ सुकन्या समृद्धि योजना जैसी तमान स्कीम्स को भारत में बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा वही देश में स्कूल जाने वाली बच्चियों की हालत बहुत अच्छी नहीं हैं ।

ये बच्चियां स्कूल जाने के बजाय घर के कामों में लगी रहती हैं. घर के लिए पैसे कमाती हैं. साथ ही घर में छोटे बच्चों का ख्याल रखती हैं. बड़ी मुश्किल से ही प्राइमरी स्कूल तक जा पाती हैं. देश में स्कूल जाने वाली बच्चियों में से 76 फीसदी और स्कूल छोड़ने वाली बच्चियों में से 90 फीसदी बच्चियां घरेलू कामों में शामिल होती हैं. स्कूल छोड़ने वाली हर चार लड़कियों में से एक बच्ची घर के लिए पैसे कमाती है. और हर दस में से एक लड़की घर में छोटे बच्चों का ख्याल रखती हैं ।

सरकारी संस्थान चाइल्ड राइट्स एंड यू (CRY) की रिपोर्ट एजुकेटिंग द गर्ल चाइल्ड के तहेत चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आयी है , (CRY) ने देश के चार हिस्सों से चार राज्य चुने. ये हैं बिहार, आंध्र प्रदेश, गुजरात और हरियाणा. इन सभी राज्यों के 20-20 गांवों का अध्ययन किया गया. साथ ही इन गांवों के जिलों में अध्ययन किया गया ।

क्राई की रिपोर्ट के मुताविक स्कूल जाने वाली बच्चियों में से 49.4 फीसदी उन परिवारों से हैं जिनकी आय 5 हजार रुपए प्रति माह या उससे कम है,स्कूल जाने वाली बच्चियों में से 49.4 फीसदी उन परिवारों से हैं जिनकी आय 5 हजार रुपए प्रति माह या उससे कम है,14 साल की उम्र से पहले ही दो तिहाई बच्चियां स्कू्ल छोड़ देती हैं. सिर्फ 58 फीसदी बच्चियां ऐसी होती हैं जो अपर प्राइमरी लेवल तक जा पाती हैं ।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है की बिहार, हरियाणा जैसे कई राज्यों में लड़कियों का शिक्षा पूरा न करने , का सबसे बड़ा कारण उन्हें जल्दी शादी के लिए विवश करना, घरेलू कामों में लगा देना, घर के बाहर काम करवाना , छोटे भाई-बहनों का ख्याल रखना जैसे अन्य कारण है जिनके वजह से लड़कियों की पढाई में बाधा आती है।

लड़कियों की पढ़ाई पूरी न होने का कारण उनके अभिभावक के अलवा वो खुद भी है (CRY) 54% लड़कियों ने खुद स्कूल छोड़ने का फैसला करती है , 25.2% लड़कियां स्कूल इसलिए छोड़ती हैं क्योंकि स्कूल दूर होता है, 17.4% लड़कियां स्कूल इसलिए छोड़ती हैं क्योंकि उन्हें कोई प्रेरणा नहीं मिलती।

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लड़कियाँ देश का भविष्य है, जितना लड़कियाँ पढ़ेगी लिखेंगी उतना देश समृद्ध होगा और प्रगति की तरफ बढ़ेगा अभिभावक को भी यह समझना चाहिए की शिक्षा ही एक माध्यम जिससे वो अपनी दयनीय स्थिति को बेहतर बना सकती है।