शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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पोलैंड: संवैधानिक न्यायालय के प्रमुख निलंबित, राष्ट्रपति को विदेश दौरा छोड़कर लौटना पड़ा

पोलैंड में एक बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक संकट गहरा गया है। देश के संवैधानिक न्यायाधिकरण (टीके) के अध्यक्ष और उनके डिप्टी को निलंबित कर दिया गया है, जिसके बाद देश भर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं…

पोलैंड: संवैधानिक न्यायालय के प्रमुख निलंबित, राष्ट्रपति को विदेश दौरा छोड़कर लौटना पड़ा
(फोटो: IANS)

पोलैंड में एक बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक संकट गहरा गया है। देश के संवैधानिक न्यायाधिकरण (टीके) के अध्यक्ष और उनके डिप्टी को निलंबित कर दिया गया है, जिसके बाद देश भर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि राष्ट्रपति कैरोल नाव्रोकी को अपनी विदेश यात्रा बीच में ही छोड़कर वापस लौटना पड़ा।

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शुक्रवार को हुए इस निलंबन के बाद राजधानी वारसा में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। विपक्षी नेताओं ने इस घटनाक्रम को 'तख्तापलट' बताया है, जबकि प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने इसे कानून व्यवस्था बहाल करने की एक ज़रूरी कोशिश करार दिया है।

विवाद की जड़ क्या है?

यह पूरा मामला पोलैंड के संवैधानिक न्यायालय के नेतृत्व और जजों की नियुक्ति को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद से जुड़ा है। पिछली 'लॉ एंड जस्टिस' (पीआईएस) पार्टी की सरकार पर आरोप थे कि उसने अदालत में अपने वफादार जजों को नियुक्त कर इसका राजनीतिकरण कर दिया था। 2023 के अंत में सत्ता में आई प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की मध्यमार्गी गठबंधन सरकार ने पिछली सरकार के इन फैसलों की वैधता पर लगातार सवाल उठाए हैं।

यह विवाद उन पांच जजों की स्थिति को लेकर और भी जटिल हो गया है, जिन्हें संसद ने चुना था, लेकिन न्यायाधिकरण के अध्यक्ष बोगदान श्विएचकोव्स्की ने उन्हें मामलों की सुनवाई से रोक दिया था।

निलंबन का आदेश किसने और क्यों दिया?

निलंबन का आदेश उन्हीं पांच जजों में से एक, अन्ना कोरविन-पियोट्रोव्स्का ने जारी किया। उन्होंने अध्यक्ष श्विएचकोव्स्की और उनके डिप्टी बार्टलोमी सोचांस्की को एक महीने के लिए निलंबित कर दिया। अपनी वरिष्ठता का हवाला देते हुए, कोरविन-पियोट्रोव्स्का ने इस कार्रवाई के लिए 'कॉमन कोर्ट्स के संगठन से जुड़े कानून' के अनुच्छेद 130 का इस्तेमाल किया है। उन्होंने श्विएचकोव्स्की पर अदालत की आम सभा की बैठक न बुलाने समेत कई अनियमितताओं का आरोप लगाया और अपने कदम को "संवैधानिक रूप से बेहद जरूरी" बताया।

सरकार और राष्ट्रपति का रुख

संवैधानिक न्यायाधिकरण की इमारत में पुलिस के दाखिल होने के बाद राष्ट्रपति नाव्रोकी ने 'एक्स' पर लिखा कि "ऐसे समय में, राष्ट्रपति का पोलैंड में होना जरूरी है," और वह स्वदेश लौट रहे हैं। वहीं, प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने अपनी सरकार के कदमों का बचाव किया है। उन्होंने 'एक्स' पर पोस्ट किया, "कानून के शासन को बहाल करना हमारा कर्तव्य है... पीआईएस के दौर में वर्षों तक चली अराजकता के बाद, यह एक कठिन प्रक्रिया है, जिसके लिए निर्णायक कदम उठाने की आवश्यकता है।"

अदालत और यूरोपीय संघ का संदर्भ

संवैधानिक न्यायाधिकरण पोलैंड की एक विशेष अदालत है जो कानूनों की संवैधानिक वैधता पर फैसला करती है। जजों की नियुक्ति का यह विवाद पिछली सरकार और यूरोपीय संघ के बीच 'कानून के शासन' को लेकर हुए बड़े टकराव का भी हिस्सा था। न्यायपालिका के राजनीतिकरण के आरोपों के चलते यूरोपीय आयोग ने पोलैंड को मिलने वाली अरबों यूरो की फंडिंग रोक दी थी। प्रधानमंत्री टस्क ने 2023 के चुनाव में न्यायपालिका की निष्पक्षता बहाल करने का वादा किया था।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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