SC/ST Act पर कोर्ट का बड़ा फैसला

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने SC/ST Act पर फैसला सुनाते हुए कहा है कि अगर सार्वजनिक स्थान पर अपराध होता है, तभी यह SC/ST Act के अंतर्गत आएगा. चलिए जानते हैं क्या है SC/ST Act और क्या है ये पूरा मामला ?

क्या है SC/ST Act ?
अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों के साथ काफी पुराने समय से ही भेदभाव होता रहा है. इसे रोकने के लिए 1989 में एक कानून बनाया गया. इसका उद्देश्य था कि SC/ST जो अत्याचार और भेदभाव किए जाते थे उनको रोका जा सकें. इस कानून के तहत अगर कोई भेदभाव करता है तो उसके खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान है.


अब देखते हैं क्या है पूरा मामला ?
दरअसल इस मामले में शिकायत कर्ता विनोद कुमार तनया खनन विभाग में काम करते हैं. उन पर विभागीय जांच विचाराधीन थी. इसी जांच के सिलसिले में KP ठाकुर जो की खनन विभाग में एक अधिकारी हैं ने विनोद कुमार तनया को अपने कार्यालय में साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए बुलाया था.जब वो कार्यालय में आए तो उनके साथ उनके सहकर्मी MP तिवारी भी थे. इसके बाद KP ठाकुर ने MP तिवारी को विभागीय जांच में दखल ला देने की बात बोलकर बाहर जाने को कहा क्योंकि उनका मानना था कि MP तिवारी को विभागीय जांच में दखलअंदाजी करने की आदत हो गई है. जिसके बाद KP ठाकुर के खिलाफ जान से मारने की धमकी के साथ – साथ SC/ST Act की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया. जिस पर KP ठाकुर ने याचिका दायर करते हुए कहा कि जब ये घटना हुई उस समय कार्यालय में और कोई नहीं था. जो इस घटना का साक्षी हो. इस बात को ध्यान में रखते हुए उनपर SC/ST Act की धाराओं के तहत मामला दर्ज नहीं होना चाहिए. कोर्ट ने इस दलील को मानते हुए कहा कि SC/ST Act की धाराओं को रद्द करते हुए मारपीट जान से मारने की धमकी व अन्य धाराओं के आधार पर केस चलाने की छूट दी.

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अपने इस फैसले में कोर्ट ने इस बात को माना कि सार्वजनिक स्थानों पर हुई धटना को ही SC/ST Act के तहत दर्ज किया जाएगा.

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