कांग्रेस भी बनवाना चाहती थी “राम मंदिर”। जानें…. BJP ने क्यों नहीं किया समर्थन ?

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चन्द्रशेखर की सरकार गिरने के बाद देश को फिर चुनावों का सामना करना पड़ा। 1991 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत हुई और पीवी नरसिम्हा राव ने प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली। नरसिम्हा राव की छवि नरम हिन्दुवादी नेता के तौर पर जानी जाती थी। 6 दिसंबर 1992 को कार सेवकों द्वारा बाबरी मस्ज़िद का ढांचा गिराने जाने के बाद देशभर में तनावग्रस्त माहौल पैदा हो गया। बाबरी मस्ज़िद विध्वंस के एक महीने बाद कांग्रेसी प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने “Soft हिन्दुत्व के रास्ते पर चलते हुए 13 जनवरी 1993 को अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए अध्यादेश लेकर आए। जिसे राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिली और सरकार ने राम मंदिर बनाने को लेकर एक बिल भी संसद में पेश किया था। बिल और अध्यादेश में ये था कि सरकारको 30.70 एकड़ ज़मीन का अधिग्रहण करना था और जिसके बाद, ज़मीन का अधिग्रहण किया भी गया लेकिन, सरकार की योजना थी उस अधिग्रहित ज़मीन पर राम मंदिर, मस्ज़िद, एक म्यूज़ियम और एक पुस्तकालय बनवाया जाय। BJP, BJP से जुड़े संगठनों और  मुस्लिम संगठनों ने सरकार की इस योजना का विरोध किया था।