कांग्रेस का भाजपा पर बड़ा हमला, '13 करोड़ वोटों की चोरी और संस्थाओं के भगवाकरण' का लगाया आरोप
हैदराबाद में कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के…
हैदराबाद में कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस नेताओं ने '13 करोड़ वोटों की चोरी' का दावा करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की और देश की संवैधानिक संस्थाओं के 'भगवाकरण' पर चिंता जताई।
चुनाव आयोग पर सवाल और इस्तीफे की मांग
कांग्रेस नेता जहीर ललानी ने सीधे तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "13 करोड़ वोटों की चोरी हुई है।" इसी मुद्दे को आधार बनाकर उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। ललानी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के व्यवहार को 'अहंकारी और अस्वीकार्य' बताते हुए इस कथित वोट चोरी के मामले में जवाबदेही तय करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दौर को याद करते हुए कहा कि तब विपक्ष का सम्मान किया जाता था, लेकिन अब राजनीतिक माहौल बदल गया है और लोगों के वोट हटाए जा रहे हैं।
संस्थाओं के 'भगवाकरण' का आरोप
वहीं, कांग्रेस के एक अन्य नेता वी. हनुमंत राव ने इन आरोपों को एक गंभीर कानूनी और संस्थागत मुद्दा बताया। उन्होंने दावा किया कि आरएसएस, भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश की संस्थाओं का भगवाकरण किया जा रहा है। उन्होंने एक सर्वे का हवाला देते हुए यह भी कहा कि उसमें अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) का तो उल्लेख था, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए अलग से कोई कॉलम नहीं था। राव के मुताबिक, इन मुद्दों पर लोगों में नाराजगी है और कांग्रेस नेता राहुल गांधी इसी के खिलाफ 'न्याय की लड़ाई' लड़ रहे हैं।
राजीव गांधी के साथ अपने संबंधों को किया याद
इस दौरान वी. हनुमंत राव ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ अपने पुराने राजनीतिक संबंधों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि किस तरह राजीव गांधी के कार्यकाल में वह प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के अध्यक्ष बने और मुख्यमंत्री बनने के बेहद करीब पहुंच गए थे। उन्होंने कहा कि अगर राजीव गांधी की इच्छा के अनुसार प्रस्ताव पारित हो गया होता, तो वह मुख्यमंत्री बन जाते, लेकिन उन्होंने इसके लिए जिम्मेदार लोगों का नाम लेने से इनकार कर दिया।
इनपुट: IANS



