यूपी में महिला सुरक्षा पर कांग्रेस का हमला, आराधना मिश्रा ने कानून-व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल
उत्तर प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' ने पिछले एक हफ्ते में हुई कई गंभीर…
उत्तर प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' ने पिछले एक हफ्ते में हुई कई गंभीर घटनाओं का हवाला देते हुए कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, उन्होंने रविवार को कहा कि मौजूदा सरकार में उत्तर प्रदेश बेटियों के लिए लगातार असुरक्षित होता जा रहा है।
आराधना मिश्रा ने अपनी बात रखते हुए कहा, "घर से स्कूल निकली बेटियां लौटकर घर नहीं आती हैं, दुष्कर्म का शिकार हो जाती हैं और फिर मौत के घाट उतार दी जाती हैं। अगर बच गईं तो गर्भवती हो जाती हैं और प्रसव पीड़ा से नाबालिग और उसके बच्चे की मौत हो जाती है।" उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दस वर्षों में सरकार की विफलता की ऐसी दर्दनाक घटनाएं पूरे प्रदेश में सामने आई हैं।
राज्य भर में अपराधों की लंबी सूची
कांग्रेस ने अपनी बात को पुख्ता करने के लिए प्रदेश के अलग-अलग जिलों से हाल में सामने आईं कई घटनाओं का जिक्र किया। इनमें बुलंदशहर में 16 वर्षीय छात्रा का अपहरण और गैंगरेप, बस्ती में 15 वर्षीय छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म और बांदा में नाबालिग से गैंगरेप के आरोप शामिल हैं। इसके अलावा, पार्टी ने ललितपुर में पांच साल की बच्ची से, प्रयागराज में 10 साल की बच्ची से और मुजफ्फरनगर में 16 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म के आरोपों का भी उल्लेख किया।
कांग्रेस की सूची में कौशांबी में किशोरी से दुष्कर्म और उसके गर्भवती होने, गोरखपुर में नाबालिग के अपहरण व दुष्कर्म तथा मेरठ में छात्रा से दुष्कर्म कर वीडियो वायरल करने की धमकी देने जैसी घटनाएं भी शामिल हैं। सोनभद्र में एक 14 वर्षीय बलात्कार पीड़िता की प्रसव के दौरान मौत और लखनऊ के निगोहां में 15 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म के मामले को भी उठाया गया।
आंकड़े और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
आराधना मिश्रा ने कहा कि यह सिर्फ कुछ घटनाओं का मामला नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था का सवाल है। उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में एक साल में महिलाओं के विरुद्ध अपराध के 66,381 मामले दर्ज हुए, यानी प्रतिदिन औसतन 182 मामले। इसी दौरान दुष्कर्म के 3,516 मामले (लगभग 9.6 प्रतिदिन) और हत्या के 3,206 मामले (लगभग 8.8 प्रतिदिन) दर्ज हुए। एसिड अटैक के 31 मामले भी सामने आए।
उन्होंने 30 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूपी पुलिस की कार्यशैली पर की गई एक टिप्पणी का भी जिक्र किया और कहा कि शीर्ष अदालत की फटकार के बावजूद सरकार के कामकाज में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। मिश्रा ने सवाल किया, "जिसने उत्तर प्रदेश का यह हाल किया, उसे और पांच साल क्यों दिए जाएं?" उन्होंने कहा कि जो सरकार बेटियों को सुरक्षित स्कूल, सड़क और घर नहीं दे सकती, उसे जनता जवाब देगी, क्योंकि 'बेटी बचाओ' सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
इनपुट: IANS



