खड़गे के बयान पर शिवसेना का पलटवार, निरुपम ने प्रधानमंत्री मोदी से माफी की मांग की
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत पिता पर की गई टिप्पणी को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने खड़गे से तत्काल माफी की…
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत पिता पर की गई टिप्पणी को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने खड़गे से तत्काल माफी की मांग करते हुए कहा कि राजनीतिक विवाद में प्रधानमंत्री के पिता को घसीटना अनुचित है और यह कांग्रेस अध्यक्ष पद की गरिमा के खिलाफ है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, निरुपम ने इस मुद्दे पर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण के रुख का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि चव्हाण जैसे अनुभवी नेता ने भी माना है कि खड़गे को ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था, जो कांग्रेस अध्यक्ष के बयान पर गंभीर सवाल खड़े करता है। निरुपम ने पटना में दिए गए खड़गे के बयान को अपमानजनक बताते हुए जोर दिया कि सार्वजनिक जीवन में नेताओं को अपनी भाषा और पद का ध्यान रखना चाहिए।
किसानों के लिए राहत पैकेज
एक अन्य विषय पर बात करते हुए, संजय निरुपम ने महाराष्ट्र में सूखे से प्रभावित किसानों के लिए राज्य सरकार द्वारा घोषित ₹7,500 करोड़ के सहायता पैकेज को एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि राज्य के 36 में से लगभग 20 से 25 जिलों में अकाल जैसी स्थिति के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हो गई थीं, जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ।
निरुपम के मुताबिक, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित केंद्र की एक टीम ने भी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया था। सरकार के वादे के अनुरूप, कैबिनेट ने यह पैकेज घोषित किया है ताकि किसानों की दिवाली अंधेरे में न बीते। इस योजना के तहत हर किसान को कम से कम ₹5,000 की सहायता मिलेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह अंतिम राहत नहीं है और सरकार भविष्य में बैंक ऋण, बीज, खाद और बिजली बिल जैसे मुद्दों पर भी विचार करेगी।
कांग्रेस के 'वोट चोरी' के आरोपों पर सवाल
संजय निरुपम ने कांग्रेस द्वारा लगाए जाने वाले 'वोट चोरी' के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने हाल ही में हुए विधान परिषद चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि ये चुनाव बैलेट पेपर से हुए थे, फिर भी कांग्रेस 28 में से एक भी सीट नहीं जीत सकी। उन्होंने कहा कि इन चुनावों में मतदाता स्नातक और शिक्षक वर्ग से थे, जिनके बीच भी कांग्रेस समर्थन हासिल नहीं कर पाई।
निरुपम ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी हार के लिए कभी ईवीएम, तो कभी मतदाता सूची या चुनाव आयोग को दोष देती है। उन्होंने कांग्रेस को सलाह दी कि वह संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने के बजाय अपनी राजनीतिक रणनीति की समीक्षा करे। निरुपम ने चेतावनी दी कि अगर यही रवैया रहा तो 2029 तक कांग्रेस अपने बचे-खुचे राज्यों से भी सत्ता खो सकती है।
इनपुट: IANS



