योगी अखिलेश से कमजोर सीएम?

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यूपी में जब योगी मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने परिवर्तन का वादा किया, लेकिन क्या ऐसा हुआ? महिलाओं के खिलाफ अपराध का खात्मा, गुंडाराज की विदाई, गड्ढा मुक्त उत्तर-प्रदेश की सड़कें जैसे कई मुद्दों पर जोर-शोर से बात हुई। प्रयास भी किया गया लेकिन सफलता मिलती नहीं दिख रही है।

योगी दिल्ली की शरण में क्यों?

क्या योगी आदित्यनाथ की मोदी या अमित शाह से कोई शिकायत हुई है या फिर यूपी के हालात को देखते हुए योगी जी को अमित शाह ने हिसाब-किताब के लिए बुलाया? क्या योगी, मोदी और अमित शाह के एजेंडे से ज्यादा आरएसएस के एजेंडे पर काम कर रहे हैं? इसलिए उनको दिल्ली बुलाया गया है?

यूपी की सत्ता मुख्यमंत्रियों के हाथ में नहीं होता?

अखिलेश के मुख्यमंत्री बनते के साथ ही चर्चा शुरू हो गई थी, कि शासन तो मुलायम का ही चलेगा और हुआ भी वही जिसका अंदेशा था, जिसका परिणाम हमें 2017 विधानसभा चुनाव में पिता-पुत्र में वर्चस्व की लड़ाई के रूप में देखने को मिला जिसमें अखिलेश की जीत हुई, पर अखिलेश के पास एक फायदा ये था कि मुलायम सिंह यादव उनके पिता थे इसलिए ज्यादातर उनकी बातें मान ली जाती थी और मुलायम के बुढ़ापे के कारण अखिलेश का दबदबा पार्टी में बढ़ता गया । योगी जी की समस्या ये है कि उनसे हिसाब लेने वाले मोदी और अमित शाह हैं, जो उन्हें कभी भी दिल्ली बुला लेते हैं। योगी जी को बार-बार हिसाब देने के लिए दिल्ली आना पड़ता है। यूपी में भी उनकी पार्टी में कई नेता उनके प्रतिद्वंदी है। अखिलेश का कोई प्रतिद्वंदी नहीं था।

निश्चित रूप से अखिलेश सरकार में कुछ ऐसे भी काम हुए हैं जिसे अच्छा कहा जा सकता है और योगी राज में भी कुछ ऐसा काम होगा जो बेहतर होगा। कुल मिलाकर यूपी की जनता को सत्ता परिवर्तन से बहुत ज्यादा लाभ मिलता नहीं दिख रहा है।

 

 

 

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