Citizenship Amendment Bill: राज्यसभा में पारित होकर बना कानून

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लोकसभा और राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल पारित होने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी इस बिल को मंजूरी दे दी। जिसके बाद अब ये कानून बन चुका है। इसका सीधा तात्पर्य यह है कि अफगानिस्तान पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदू-जैन-बौद्ध-सिख-ईसाई-पारसी शरणार्थी आसानी से भारत की नागरिकता पा सकेंगे।

CAB यानि सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल आखिरकार देश में आयी ही गया लोकसभा में क्लियर मैंडेट के साथ नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पारित हो गया था। और वही बुधवार को राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक को पेश किया, जिस पर करीब 6 घंटे की बहस के बाद राज्यसभा में भी 125 वोट के साथ नागरिकता संशोधन विधेयक पारित हो चुका है।

सिटीजन अमेंडमेंट बिल के कानून में तब्दील होने से अफगानिस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान जैसे देशों से शरणार्थी भारत आएंगे, उन्हें यहां की नागरिकता मिलना आसान हो जाएगा. इसके लिए उन्हें भारत में कम से कम 6 साल बिताने होंगे. पहले नागरिकता देने का पैमाना 11 साल से अधिक था।

इस बिल के पारित होने में मोदी सरकार को काफी चुनौती का सामना करना पड़ा। एनडीए में भी इस बिल का विरोध बड़े स्तर पर हुआ। इस बिल को लेकर देश के कुछ हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन जोरों पर है। असम में विरोध प्रदर्शन में तोड़-फोड़ की गई, जिसके बाद वहां 24 घंटे के लिए 10 जिलों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं।

असम, बंगाल जैसे राज्यों में शरणार्थियों का मुद्दा काफी हद तक हावी रहा, असम में विधानसभा चुनाव या देश में लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने NRC के मसले को जोर-शोर से उठाया था, जिसका उन्हें फायदा भी मिला था। इस बिल को लेकर राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे।
विपक्ष ने लगतार इस बिल का विरोध किया, विपक्ष के मुताबिक यह बिल सविंधान के विरोध में है। इस विधेयक के खिलाफ असम सहित पूर्वोत्तर के कई राज्यों में प्रदर्शन हो रहा है. बुधवार को विधेयक को स्थायी समिति में भेजने का प्रस्ताव खारिज हो गया. समिति के पास इसे नहीं भेजने के पक्ष में 124 वोट और विरोध में 99 वोट पड़े. शिवसेना ने सदन से वॉकआउट किया और वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।

विपक्ष के अनुसार यह बिल मुस्लिम विरोधी है ,लेकिन गृह मंत्री अमित शाह की तरफ से इसपर यह बयान आया कि नागरिकता संशोधन विधेयक मुसलमानों को नुकसान पहुंचाने वाला नहीं है. उन्होंने साथ ही यह भी तर्क प्रस्तुत किया कि अगर देश का विभाजन न हुआ होता और धर्म के आधार पर न हुआ होता तो आज यह विधेयक लेकर आने की जरूरत नहीं पड़ती।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में अपने भाषण में दावा किया था कि ऐसे लाखों-करोड़ों लोग हैं जिन्हें इस कानून से फायदा मिलेगा. नए कानून के मुताबिक, ये सभी शरणार्थियों पर लागू होगा चाहे वो किसी भी तारीख से आए हों।

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सरकार कि तरफ से एक कटऑफ तारीख भी जारी की गई है, 31 दिसंबर 2014 से पहले आए सभी हिंदू-जैन-बौद्ध-सिख-ईसाई-पारसी शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिल जाएगी। इस कानून के आने से देश में बहुत से बदलाव आने की संभावना है , इस कानून के पक्ष में लोग देश भर में जश्न मना रहे है, वही विपक्ष में इसका पुरजोर विरोध हो रहा है।